/>

Breaking

Tuesday, September 1, 2020

प्रणब मुखर्जी:मां भद्रकाली के उपासक थे प्रणब, अब उनके भेंट किए घोड़े होंगे स्थापित

प्रणब मुखर्जी:मां भद्रकाली के उपासक थे प्रणब, अब उनके भेंट किए घोड़े होंगे स्थापित

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के निधन से कुरुक्षेत्र में भी शोक है। प्रणब मुखर्जी राष्ट्रपति रहते हुए भी कुरुक्षेत्र आ चुके हैं। वे और उनका परिवार मां भद्रकाली का उपासक है। यही वजह है कि जब प्रणब कुरुक्षेत्र आए थे तो अन्य तीर्थस्थलों के साथ मां भद्रकाली शक्तिपीठ देवी कूप मंदिर में भी खास तौर पर पहुंचे।

यहां बाकायदा पूजा-अर्चना की। साथ ही मान्यता अनुसार घोड़े भी भेंट किए। उन्होंने तब मंदिर में देवी कूप पर चांदी के घोड़े चढ़ाए थे। अब इन घोड़ों को उनकी यादगार के तौर पर मंदिर परिसर में ही स्थापित किया जाएगा।

मां के उपासक है मुखर्जी परिवार : भद्रकाली शक्तिपीठ के पीठाध्यक्ष सतपाल शर्मा ने उनके निधन पर शोक जताया। उनकी आत्मिक शांति के लिए मंदिर में प्रार्थना भी की। सतपाल ने बताया कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी मां भद्रकाली के उपासक थे। उन्होंने बताया था कि उनके पैतृक गांव में तो मां काली का मंदिर भी बना है।

9 अप्रैल 2013 को वे कुरुक्षेत्र के दौरे पर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने विशेषतौर पर मां भद्रकाली मंदिर में का दौरा रखवाया। यहां उन्होंने माता रानी की पूजा की। मंदिर की मान्यता के अनुसार वे यहां देवी कूप पर अर्पित करने के लिए चांदी के छोटे घोड़े भी साथ लाए थे।

अब इन घोड़ों को उनकी यादगार के तौर पर भद्रकाली शक्तिपीठ में स्थापित किया जाएगा। बताया कि उनके बेटे अभिजीत अक्सर मंदिर में पूजा करने आते हैं। वे बिना किसी को सूचित किए ही मंदिर में पूजन के लिए आते हैं।

प्रणब मुखर्जी के निधन से राष्ट्र को बड़ी क्षति : बवेजा प्रणब मुखर्जी के निधन पर कांग्रेस नेताओं ने भी शोक जताया। पूर्व मंत्री अशोक अरोड़ा ने कहा कि प्रणब मुखर्जी एक महान व्यक्तित्व थे। केंद्रीय मंत्री रहते उन्होंने कई अहम फैसले लेकर देश को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दिया।

वहीं राष्ट्रीय पंजाबी महासभा के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष मधु सूदन बवेजा ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के निधन से राष्ट्र को बड़ी क्षति है। देश ने एक दूरदर्शी नेता खोया है। उन्होंने कहा कि मुखर्जी ने अपनी क्षमता, कठिन परिश्रम, समर्पण और अनुशासन के सहारे देश का शीर्षस्थ पद पाया था।

No comments:

Post a Comment