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Saturday, October 3, 2020

फर्जीवाड़ा:खुद को एसपी ऑफिस में क्लर्क-एएसआई बता ठगी की, फर्जी जॉइनिंग लेटर देकर 1-1 लाख रुपए ऐंठे

फर्जीवाड़ा:खुद को एसपी ऑफिस में क्लर्क-एएसआई बता ठगी की, फर्जी जॉइनिंग लेटर देकर 1-1 लाख रुपए ऐंठे

यमुनानगर : एक युवक ने खुद को एसपी ऑफिस का क्लर्क, छछरौली थाने का एएसआई और मधुबन में अंडरट्रेनी सब इंस्पेक्टर बताकर एक युवक ने डीसी के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा कर दिया। बेरोजगारों को रोजगार दिलाने के नाम पर खुद ही डीसी की तरफ से फर्जी अपॉइंटमेंट लेटर जारी कर दिए। सभी को डीसी आफिस में कंप्यूटर ऑपरेटर लगवाना था, लेकिन जब जॉइनिंग करने लेटर लेकर युवा पहुंचे तो पता चला कि उनके साथ तो ठगी हो गई। परत दर परत खुलासा होता गया और पता चला कि ठगी करने वाला न तो क्लर्क है और न ही एएसआई।
हर दो माह में वह अपना पद बदल लेता था। नवंबर में क्लर्क बताया तो फरवरी 2020 में एएसआई और कुछ दिन बाद सब इंस्पेक्टर भर्ती होने की बात कहने लगा। मामला बिगड़ा तो ठगी करने वालों ने पैसे लौटाने का आश्वासन दिया, लेकिन पैसे नहीं दिए। एक शिकायत हुडा पुलिस थाने में पहुंच गई, लेकिन हद तो तब हो गई कि यहां पर पुलिस ने भी मामले में आरोपी का ही साथ दिया। मामले में फैसला तक करा दिया और कहा कि डीसी का लेटर जारी करना कोई अपराध नहीं है। इसमें कोई कार्रवाई नहीं बनती।
हालांकि वहां उस केस में समझौता हो गया, लेकिन ठगी के शिकार हुए ऐसे तीन लोगों तक भास्कर पहुंचा। सभी को 1.20 लाख में डीसी ऑफिस में कंप्यूटर ऑपरेटर लगवाने के नाम पर पैसे ठगे गए। पैसे देने के लिए किसी ने ज्वैलरी बेची तो किसी ने ब्याज पर पैसे लिए। एक शिकायत पर थाने में समझौता हो चुका तो दो में ठगी करने वाले ने पैसे वापस करने का आश्वासन दिया है। इसलिए फिलहाल उन्होंने शिकायत नहीं दी।
एसपी ऑफिस के कई कर्मचारियों से ठगी करने वाले की जान पहचान
सामने आया है कि ठगी करने वाला एसपी ऑफिस में कई कर्मचारियों को जानता है। वह उनकी जान-पहचान का फायदा उठाकर ही रौब झाड़ता था। वहीं कर्मचारियों के नाम लेते हुए उसकी ऑडियो भी सामने आई है। वहीं जब ठगी के शिकार हुए लोगों को नौकरी नहीं मिली तो वे उस पर फोन करते थे। वहीं इस दौरान वह फोन नहीं उठाता था। बाद में कॉल आती थी और फोन करने वाले को कहा जाता था कि आपकी नौकरी पक्की हो गई है। सर पर कॉल कर परेशान न करें। इस तरह से षड्यंत्र का पूरा जाल बुना हुआ था। 19 सितंबर को एक समझौता हुडा थाने में हुआ। इसमें पैसे लेने वाले ने लिखकर दिया कि उसके खिलाफ जो शिकायत आई थी, उस पर उनका समझौता हो गया है। 20 हजार रुपए आज दे दिए गए और 30 हजार रुपए नवंबर से पहले देने हैं। अगर वह पैसे नहीं देता तो जिम्मेदारी लेने वाले पैसे देंगे। जो उसने शिकायतकर्ता के कागजात लिए थे, वह भी उन्हें वापस कर देगा। 4 लोगों ने इस समझौते की कॉपी पर साइन किए हुए हैं।

यह शिकायत पहुंची थाने तक

एक युवक ने एसपी ऑफिस में 11 सितंबर को शिकायत दी थी कि आरोपी उसका स्कूल के समय से जानकार है। उसने उसे कहा था कि वह एसपी ऑफिस में क्लर्क लगा हुआ है। उसने उसे सरकारी नौकरी लगवाने की बात कही। तब उसने सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर डेढ़ लाख रुपए मांगे। कहा था कि वह 4 माह में उसे डीसी ऑफिस में कंप्यूटर ऑपरेटर लगवा देगा। वह उसकी बातों में आ गया और उसने किस्तों में कर उसे 1.50 लाख रुपए दिए, लेकिन उसे नौकरी नहीं लगवाया। इस दौरान उसके पास आरोपी ने डीसी ऑफिस के अधीक्षक के नाम से फोन कर नौकरी दिलाने का आश्वासन दिया।
वहीं बाद में वह कहने लगा कि अब वह एक्साइज विभाग में क्लर्क लग गया है। वहीं कुछ दिन बाद छछरौली थाने में एएसआई लगने की बात कहने लगा। 24 जुलाई 2020 को आरोपी ने उसे डीसी के नाम से एक अपॉइंटमेंट लेटर दिया। 10 अगस्त से उसे ड्यूटी जॉइन करनी थी, लेकिन वह लेटर फर्जी निकाला। इसके बाद जब उसने आरोपी से बात की तो वह कहने लगा कि वह अब सब इंस्पेक्टर लग गया है और उसकी मधुबन में ट्रेनिंग चल रही है। इसके बाद उसने उसकी कॉल रिसीव करनी बंद कर दी।

*सुबह 9 से शाम 4 बजे तक होगी ड्यूटी*

ठगी करने वाले द्वारा दो लड़कियां और एक युवक को दिए गए लेटर भास्कर को मिले हैं। उसमें उसने 23 हजार रुपए पे स्केल लिखा था। वहीं ड्यूटी का समय सुबह 9 से शाम 4 बजे तक लिखा गया। वहीं बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा इससे भी होता है कि जो तीन लोगों को लेटर दिए गए, उसमें एक ही मेमो नंबर-एडीयूएलबी/2020/28750 लिखा है।

*लेटर फर्जी हैं, एसपी से कार्रवाई को बात करेंगे*

युवाओं को नौकरी के नाम पर फर्जी लेटर दिए हैं। मैंने इन लेटरों की जांच कराई है। कार्रवाई के लिए एसपी से बात करेंगे। -मुकुल कुमार, डीसी।
जांच से पहले कुछ नहीं कह सकते : एसपी
जो शिकायत आई है, उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। अगर आई होगी तो जांच से पहले कुछ नहीं कहा जा सकता। -कमलदीप गोयल, एसपी।

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