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Friday, October 9, 2020

घोटाले का खुलासा:उर्दू अकादमी में 15 लाख का फर्जीवाड़ा, पूर्व निदेशक पर विजिलेंस ने एफआईआर दर्ज की

घोटाले का खुलासा:उर्दू अकादमी में 15 लाख का फर्जीवाड़ा, पूर्व निदेशक पर विजिलेंस ने एफआईआर दर्ज की

चंडीगढ़ : हरियाणा उर्दू अकादमी में फर्जीवाड़ा सामने आया है। यह सारा खेल लेखकों के अतिथि सत्कार के नाम पर खाने-पीने का खर्चा दिखाने के साथ यात्रा भत्ता, मेडिकल बिलों में किया गया है। खर्चे के जो चेक बनाए गए, वे सेवादार व चालकों के नाम से जारी किए और पैसा तत्कालीन निदेशक की जेब में जाता रहा। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के लेखा अधिकारी द्वारा किए गए ऑडिट में खुलासा हुआ कि 2018 में अकादमी में 15,07,872 रु. की गड़बड़ी की गई है।
इसकी जांच स्टेट विजिलेंस ब्यूरो के डीएसपी शरीफ सिंह को सौंपी गई। जांच रिपोर्ट के अनुसार एक-एक दिन में लेखकों के खाने-पीने के 3-3 बिल बनाए गए। सरकारी गाड़ी का साल में दो-दो बार बीमा कराने के नाम पर पैसा निकाला। यात्रा भत्ता बिना किसी की अनुमति के निजी खाते में जमा कर लिया। प्राथमिक जांच में ही लाखों रुपए की हेराफेरी सामने आने के बाद विजिलेंस ब्यूरो ने तत्कालीन निदेशक डॉ. नरेंद्र कुमार पर एफआईआर दर्ज कर ली है। यह जांच 2018 में हुई गड़बड़ी की है। अब विजिलेंस के डीएसपी ओमप्रकाश इस मामले की गहराई से जांच करेंगे।

लेखकों के खाने-पीने के नाम पर ऐसे जारी होते रहे चेक, एक दिन में तीन बार दिखाया खर्च

जांच में सामने आया कि 2018 में 2 फरवरी को लेखकों के खाने-पीने व किताबों के नाम पर 25417 रुपए खर्च दिखाया। यह राशि सेल्समैन कम क्लर्क ने ली। इसकी कोई स्वीकृति नहीं थी। 16 जुलाई को लेखकों के नाम पर ही 14009 रुपए का खर्च दिखाया और चालक प्रमोद कुमार के नाम चेक जारी किया। इसके 3 दिन बाद फिर इसी प्रकार 8947 रुपए का खर्च दिखाया व सेवादार कपूरचंद के नाम चेक जारी हुआ। विजिलेंस जांच में कपूरचंद ने बताया कि उसे न तो चेक मिला और न उसे विड्राॅ कराया। उसने कोई सामान भी नहीं खरीदा। यह बिल तत्कालीन निदेशक डॉ. नरेंद्र कुमार स्वयं लाए और उनके आदेश पर ही उसने बिलों पर हस्ताक्षर किए।
यह चेक उन्होंने खुद अपने पास रख लिए। इस खर्चे की भी अनुमति नहीं ली गई। 18 जुलाई को लेखकों के खाने-पीने के नाम पर 1605 रुपए, 27436 रुपए और 43,126 रुपए के तीन चेक जारी हुए। पहली दो राशि के चेक चालक प्रमोद कुमारी के नाम जारी हुए। यह राशि भी तत्कालीन निदेशक ने ही निकलवाई। जबकि तीसरी राशि का चेक उन्होंने अपने खाते में जमा कराया। इसके अगले दिन 47,590 रुपए का खर्चा दिखा चालक के नाम चेक जारी हुआ। यह राशि भी पूर्व निदेशक के पास गई। 26 जुलाई को फिर 40,370 रुपए लेखकों के खाने-पीने और शील्ड पर खर्च हुए। चेक प्रमोद कुमार के नाम जारी हुआ और राशि दी गई निदेशक को। 7 सितंबर को भी 2010 रुपए का इसी प्रकार चेक जारी हुआ।

एक लाख रुपए का यात्रा भत्ता दिखा निजी खाते में कराए जमा

पूर्व निदेशक ने 18 अक्टूबर 2018 को 1,02,492 रुपए का यात्रा भत्ता का चेक निजी खाते में जमा कराया। इसकी सक्षम अधिकारी से कोई मंजूरी नहीं ली गई। इस भत्ते को लेकर वे विजिलेंस के सामने ठोस प्रमाण भी पेश नहीं कर पाए।

मेडिकल बिल बिना स्वीकृति के अपने खाते में किया जमा

पूर्व निदेशक पर आरोप है कि उन्होंने बिना सक्षम अधिकारी की स्वीकृति के मेडिकल बिल की राशि ले ली। उन्होंने 39,155 रुपए अपने खाते में जमा कर लिए।

गाड़ी के बीमा के नाम पर दो बार जारी की राशि

अकादमी की सरकारी गाड़ी का एक साल में दो बार बीमा कराया। जिसकी एक बार की राशि 16,219 रुपए चालक प्रमोद कुमार ने प्राप्त की। जबकि इतनी ही दूसरी राशि लेखाकार की ओर से तत्कालीन निदेशक को भेजी गई।

दिल्ली से बिना सामान खरीदे जारी हो गए हजारों रुपए

अकादमी में 8 जनवरी को दिल्ली के ज्वैलर्स से 31,360 रुपए का सामान खरीद बताया गया। इसके बदले 31,360 रुपए दिए गए। लेकिन सामान खरीदा ही नहीं किया।

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