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Wednesday, October 14, 2020

दर्दनाक हादसा:बंबूलिया में पिल्ले को निकालने तालाब में उतरे सात साल के दो जुड़वां मासूम डूबे

दर्दनाक हादसा:बंबूलिया में पिल्ले को निकालने तालाब में उतरे सात साल के दो जुड़वां मासूम डूबे

झज्जर : बंबूलिया गांव में मंगलवार दोपहर बाद हुए हादसे में 7 साल के दो जुड़वां भाइयों की घर के पास ही बने तालाब में डूबने से मौत हो गई। दुखों का ये पहाड़ गांव निवासी व खेती बाड़ी का काम करने वाले संदीप के परिवार में टूटा। दोनों भाइयों के बाद अब परिवार में इनकी तीन बड़ी बहनें ही रह गई हैं। पूरे परिवार का रो-रो कर बुरा हाल है। मंगलवार दोपहर को हमेशा की तरह 7 साल के अंश और वंश घर के बाहर खेल रहे थे।
वे एक कुत्ते के पिल्ले के पीछे दौड़ रहे थे। कुत्ते का पिल्ला तालाब में गिर गया और जब इन दोनों मासूम भाइयों को लगा कि पानी में गिरने से कुत्ते के पिल्ले को कुछ हो सकता है तो दोनों उसे बचाने के लिए गांव के तालाब में घुस गए और जहां दोनों भाई पानी में थे वहां कई फीट गहरा गड्ढा था। तालाब में उतरते समय दोनों भाई एक दूसरे का हाथ थामें थे। इस दौरान किसी को अंदाजा नहीं था कि खेल खेल में तालाब में हाथ थामे पकड़े दोनों भाई इसी अंदाज में इस दुनिया से भी एक साथ रवाना हो जाएंगे।
जब दोनों भाई गड्ढे में गिर गए और पानी उनके सिर के ऊपर आ गया तब इस दर्दनाक मंजूर को देखने के लिए आसपास कोई मौजूद नहीं था। हालांकि बताया कि जब दोनों बच्चे तालाब के पास थे तभी कुछ लोगों ने उन्हें देखा था। लेकिन उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि आमतौर पर बच्चे जब इसी प्रकार तालाब के पास रहते हैं तो इनके साथ कुछ ही पल में हादसा हो जाएगा।
इधर जब घर वालों को लगा कि अंश और वंश काफी देर से घर नहीं लौटे और जब उनकी खोजबीन हुई तब जोहड़ में दोनों डूबे हुए मिले। आनन-फानन में इनको बाहर निकाला गया अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक दोनों की मौत हो चुकी थी। इस घटनाक्रम की सूचना मिलने पर समूचे गांव के लोगों में दुख की लहर दौड़ गई। गमगीन माहौल में पुलिस ने दोनों बच्चों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए नागरिक अस्पताल ले गई और बाद में बच्चों के शवों को उसके परिजनों के हवाले कर दिया गया। दोनों बच्चों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

40 मिनट तक जोहड़ में डूबे रहे, जिन बच्चों के साथ खेल रहे थे उन्होंने ही घरवालों को बताया

पुलिस के अनुसार दोनों जुड़वां भाई अंश और वंश अपनी गली के ही दो-तीन बच्चों के साथ जोहड़ के पास खेल रहे थे। हालांकि जोहड़ में यह दोनों बच्चे ही उतरे। दोनों बच्चे गड्ढे में करीब 40 मिनट तक फंसे रहे। 40 मिनट के बाद इनके घर वालों को उन्हीं बच्चों ने सूचना दी कि अंश और वंश जोहड़ में नहाने के लिए घुस गए हैं और डुबकी लगा ली है और बाहर नहीं आए इतना सुनते ही घर के लोग जोहड़ में पहुंचे तब उनकी जान जा चुकी थी।

जोहड़ की चार दीवारी होती तो मासूमों की जान नहीं जाती

इस घटनाक्रम का दुख दाई पहलू यह भी है कि गांव के जिस 50 साल पुराने जोहड़ में डूब कर दोनों जुड़वां भाइयों की मौत हुई। उस जोहड़ की चार दीवारी बनाए जाने के लिए गांव की पंचायत कई सालों से बजट मांग रही है। लेकिन अभी तक इसका बजट मंजूर नहीं हुआ है। अगर समय पर बजट मिलने के बाद इस जोहड़ की चार दीवारी बन जाती तो मासूमों की जान नहीं जाती। गांव के सरपंच राजपाल ने इस बात को स्वीकार किया गांव जोहड़ जर्जर हाल है और इसे साफ करने, इसकी चार दीवारी बनाने के लिए वे कई बार बजट मांग चुके हैं, लेकिन बजट नहीं मिल सका है। बताया गया कि 3 साल पहले आधा जोहड़ छटाई कर दिया गया था, आधा जोहड़ बारिश का मौसम के कारण छटाई का कार्य रुक गया। सरपंच राजपाल का कहना है कई सालों से जोहड़ के चारों तरफ दीवार नहीं है। हरियाणा सरकार के पास जोहड़ की चार दीवारी के लिए पत्र भेज रखा है। भविष्य में ऐसी घटना न हो घटनाओं को रोकने के लिए जोहड़ की चार दीवारी का बजट आएगा, तब इसे बनवा दिया जाएगा।

माता-पिता का रो-रो कर बुरा हाल, मां कई बार हुई बेहोश

इस दिल दहला देने वाले घटनाक्रम के बाद से अंश और वंश के माता-पिता का रो-रो कर बुरा हाल है। इन दोनों भाइयों की मां तो घटनाक्रम की बात से मंगलवार रात तक कई बार बेहोश हो चुकी है। अब रिश्तेदारों को मां के स्वास्थ्य की भी चिंता सताने लगी है। अपने दोनों लाडलो को खोने का गम मां पर ही नहीं आसपास के लोगों और रिश्तेदारों के चेहरे पर देखा जा सकता है।

पूरे गांव के चहेते थे जुड़वां भाई अंश और वंश

बंबुलिया गांव में यह दोनों भाई जुड़वां होने की बात से प्रसिद्ध थे। जब इन दोनों भाइयों का जन्म हुआ तो गांव के लोग इन्हें देखने आते थे और अभी तक इन दोनों भाइयों की एक जैसी शक्ल और साथ-साथ खेलने की हरकतों से हर कोई इन्हें प्यार करता था। यह गांव भर के चहेते थे बने हुए थे। तीज त्यौहार के मौके पर अंश और वंश के माता पिता इन्हें जब एक जैसी ड्रेस जूते चप्पल पहनाते थे और फिर जब यह दोनों भाई अपनी गली, घर के बाहर खेलने के लिए निकलते थे तो इनका हंसना और खेलना लोगों के मनोरंजन का भी कारण बनता था। गांव की बुजुर्ग महिलाएं दोनों भाइयों को लंबी उम्र का वरदान देती नहीं थकती थी।
दोनों जुड़वां भाइयों के जोहड़ में डूबने का मामला वाकई दुखी कर देने वाला है। दोनों भाई 40 मिनट तक जोहड़ में डूबे रहे। अगर समय रहते तुरंत बचाव हो जाता तो उनकी जान बचाई भी जा सकती थी। यह घटनाक्रम लोगों की आंखें खोलने वाला है। छोटे बच्चों का मां-बाप और आस पड़ोस के लोग अब ख्याल रखें। -रघवीर सिंह, प्रभारी मातनहेल पुलिस चौकी

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