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Friday, February 19, 2021

शराब और रजिस्ट्री घोटालों की जांच सीबीआई से हो : अभय सिंह चौटाला

शराब और रजिस्ट्री घोटालों की जांच सीबीआई से हो : अभय सिंह चौटाला

-आरोप लगाया कि सभी सरकारी विभागों में दलाली के बगैर कोई काम नहीं होता

-पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा को बताया भाजपा एजेंट


चंडीगढ़ : इंडियन नेशनल लोकदल के प्रधान महासचिव अभय सिंह चौटाला ने भाजपा-जजपा गठबंधन पर जमकर हमले बोले। साथ मे पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा को भी भाजपा एजेंट की संज्ञा दी।
गुरुवार को इनेलो कार्यालय में उन्होंने पूर्व विधायक जसविंदर संधू के पुत्र गगनदीप संधू को घरवापसी करवाते हुए इनेलो में शामिल किया। उन्होंने कहा कि जितना सम्मान उन्हें पहले मिला था उससे भी ज्यादा सम्मान देंगे। साथ ही आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया की प्रभारी रेनू राणा को भी पार्टी में शामिल किया। इस दौरान कांग्रेस-जेजेपी और बीजेपी को छोडक़र आए सैकड़ों कार्यकर्ताओं को भी पार्टी में शामिल किया। 
इनेलो नेता ने भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि लॉकडाउन के दौरान नौ बड़े घोटाले किए गए जिसमें सिर्फ दो घोटालों की जांच की गई। एक रजिस्ट्री घोटाला और दूसरा शराब घोटाला। उन्होंने कहा कि उनकी मांग शुरू से ही इन घोटालों की जांच सीबीआई से करने की रही है लेकिन सरकार ने लीपापोती करते हुए इनकी जांच सीबीआई को नहीं दी। रजिस्ट्री घोटाले पर उन्होंने बोलते हुए कहा कि जांच में तीन सौ से ज्यादा लोग दोषी पाए गए हैं। इस घोटाले में विभाग का मंत्री भी शामिल है। तहसीलदारों की नियुक्ति दलालों द्वारा पैसे लेकर की गई। शराब घोटाले में भी सरकार ने लीपापोती करते हुए एसआईटी के बजाय एसईटी द्वारा जांच की गई जिसके पास कोई अधिकार नहीं थे। इससे साफ साबित होता है कि मुख्यमंत्री आबकारी मंत्री को बचाना चाहते थे। जहां एसईटी की रिपोर्ट आने पर कार्रवाई करनी चाहिए थी उसकी बजाय जांच विजिलेंस को सौंप दी गई जिसका मुखिया आईपीएस अफसरी श्रीकांत जाधव को बनाया गया। जाधव की रिपोर्ट में जो जानकारी उनके पास है उसके अनुसार जांच में दो प्रमुख लोगों के नाम सामने आए हैं, एक ईटीओ आनंद मलिक और दूसरा मीनू बेनिवाल, जिन्होंने पैसे लेकर अधिकारियों की नियुक्ति करवाई। जिनकी नियुक्ति करवाई उन्होंने जाधव के सामने यह सब स्वीकार किया और लिखित में देने से मना कर दिया और उन्हें मीनू बेनिवाल द्वारा उनकी हत्या करवाए जाने की आशंका जाहिर की।  इनेलो नेता ने दोबारा से दोहराया कि इन घोटालों की जांच सीबीआई से करवाई जाए ताकि जो असली दोषी हैं उनको पकड़ा जा सके। 
इनेलो नेता ने कहा कि प्रदेश में सरकार जमकर लूट मचा रही है। कोई भी सरकारी विभाग ऐसा नहीं है जिसमें बगैर कमीशन लिए काम हो रहा हो। उन्होंने उदाहरण देते हुए कि मुख्यमंत्री ने जब पीडब्ल्यूडी बीएंडआर की मीटिंग बुलाकर ठेकेदारों से पूछा कि काम करने में कोईदिक्कत तो नहीं आ रही, तब वहां मौजूद ठेकेदारों ने कहा कि उन्हें पांच प्रतिशत कमीशन देना पड़ता है। वैसे ही पंचायती राज में कोई भी ठेका लेना हो तो दो प्रतिशत कमीशन देना पड़ता है।
उनके इस्तीफे से किसानों पर पडऩे वाले असर पर पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि तीन मार्च को ऐलनाबाद में किसान महापंचायत होगी। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि वहां पर तिल फैंकने तक की भी जगह नहीं मिलेगी। उस दिन उनके इस्तीफे के मायने का पता चल जाएगा। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता पुलिस के घेरे में निकलते हैं। पुलिस सुरक्षा के बगैर भाजपा के मंत्री घर से बाहर नहीं निकल सकते। अब लोग उन्हें शादी तो दूर दुख में भी अपने घर नहीं आने देंगे।
पत्रकारों द्वारा पूछे गए एक और सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी खाप का नहीं है और न ही किसी जाति का है, यह आंदोलन पूरी दुनिया का आंदोलन है। विदेशों में भी किसान इस आंदोलन के पक्ष में एकत्रित हो रहे हैं। भाजपा इस आंदोलन को जाति विशेष से जोडक़र लोगों को बांटना चाहती है जबकि गुज्जर, ब्राह्मण, राजपूत, यादव सभी जाति के लोग आंदोलन में मदद कर रहे हैं। 
प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री के इस्तीफे को उनके पिता अजय चौटाला द्वारा अपनी जेब में रखने के बयान पर बोले कि अजय चौटाला तो अब जेल में है, तो क्या इस्तीफा भी जेल में ले गए हैं? उन्होंने सरकार की गठबंधन पार्टी का नाम लिए बगैर कहा कि एक पार्टी बहुत तेजी से आगे बढ़ी थी, लेकिन उतनी ही तेजी से उसका अंत भी हो गया है।
पत्रकारों द्वारा पीजीटी संस्कृत टीचर की नियुक्ति पर पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार को संस्कृत अध्यापकों को नियुक्ति देनी चाहिए थी। यह मामला हाईकोर्ट में लंबित है उसके बावजूद सरकार ने नई नोटिफिकेशन जारी कर दी जो कि सरासर गलत है। 
किसान संगठनों द्वारा आज किए गए रेल रोको को पूर्ण सफल बताते हुए उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी का समर्थन किसान संगठनों के साथ था। उन्होंने भाजपा सरकार पर पंचायत चुनाव को जानबूझकर टालने का आरोप भी लगाते हुए कहा कि सरकार को जनता ने नकार दिया है उनके पास पंचायत चुनाव लडऩे के लिए उम्मीदवार तक नहीं है। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि सरकार अगर आज पंचायत के चुनाव करवाती है तो उन्हें पांच प्रतिशत वोट भी नहीं मिलेंगे।
पत्रकारों द्वारा पूछे गए भूपेंद्र सिंह हुड्डा संबंधी एक अन्य सवाल पर उन्होंने बीजेपी को बचाने के लिए इस्तीफा दिया है, का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि सब आपके सामने है इसका सीधा और साफ प्रमाण है कि भूपेंद्र हुड्डा ने राज्यसभा के चुनाव में सुभाष चंद्रा को जिताने के लिए अपना बैलेट पेपर खाली छोड़ दिया था। उनके विधायकों के पैन की स्याही बदलवाकर वोट कैंसिल करवाए थे। इसके एवज में भाजपा ने अहसान चुकाते हुए राज्यसभा चुनाव में दिपेंद्र हुड्डा के खिलाफ कोई उम्मीदवार खड़ा नहीं किया और दिपेंद्र को चुनाव जितवाया। विधानसभा सत्र में भी जहां नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी निभाते हुए उन्हें कृषि कानूनों पर चर्चा के दौरान बहस करनी चाहिए थी वहीं कांग्रेस प्रस्ताव पर वोटिंग करवाने पर अड़ी रही और सदन से वॉकआउट कर चले गए थे जिससे साफ जाहिर होता है कि भूपेंद्र हुड्डा भाजपा के एजेंट के रूप में कार्य कर रहे हैं। आने वाले विधानसभा सत्र में भी भूपेंद्र हुड्डा कोई चर्चा नहीं करेंगे और विधानसभा में हंगामा करके बाहर आ जाएंगे।

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