Breaking

Saturday, March 13, 2021

कौन किसान के साथ कौन कुर्सी के साथ सबके सामने आया : पालवां

कौन किसान के साथ कौन कुर्सी के साथ सबके सामने आया : पालवां

कहा : 15 को निजीकरण विरोध दिवस मना सौपेंगे डीसी को ज्ञापन

जींद : ( संजय तिरँगाधारी ) अब प्रदेश की जनता के सामने आ चुकी है कि कौन किसान के साथ है कौन कुर्सी के साथ है। भाजपा के पक्ष में मतदान करके भाजपा, जजपा के विधायकों के साबित कर दिया है कि वो कुर्सी के साथ है। सरकार के खिलाफ जो अविश्वास कांग्रेस लेकर आई थी उसमें बेशक सरकार जीत गई हो लेकिन जनता की नजरों में अपना विश्वास अब गठबंधन सरकार खो चुकी है। यह बात भाकियू जिलाध्यक्ष आजाद पालवां ने खटकड़ टोल के पास किसानों के धरने को संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा के कार्यक्रम के अनुसार 15 मार्च को निजीकरण विरोध दिवस मनाया जाएगा। इस दिन डीसी जींद के नाम जो निजीकरण केंद्र सरकार कर रही है उसके विरोध में ज्ञापन सौंपा जाएगा। निजीकरण को बढ़ावा सरकार द्वारा दिया जा रहा है जिससे बेरोगजारी बढ़ेंगी। 23 मार्च को शहीद भगत सिंह का बलिदान दिवस मनाया जाएगा। इस दिन युवा पीली पगड़ी पहन कर आएंगे तो महिलाएं पीली चुनरी ओढ़ कर धरना स्थल पर पहुंचेंगी। 26 मार्च को भारत बंद का आह्वान किया गया है। रेल, सड़क मार्ग दोनों को बंद रखा जाएगा। 28 मार्च को धरनों पर काली होली किसान मना कर तीनों कृषि कानूनों पर विरोध जताएंगे।    
भाकियू महिला सेल जिलाध्यक्ष सिक्किम सफा खेड़ी ने कहा कि सरकार को राज हठ छोडऩी चाहिए। जो कानून किसानों को लेकर बनाने की बात केंद्र सरकार कर रही है उन कानूनों को किसान नहीं चाहते है। केंद्र सरकार अगर किसान हितैषी है तो वो स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करें, एमएसपी पर कानून बनाए तो माने कि केंद्र सरकार किसान हितैषी है। जो कानून कृषि को लेकर बने है उससे पूंजिपतियों को फायदा होगा। किसान अपनी फसल, नस्ल की लड़ाई के लिए अपनी जान की कुर्बानी देने से भी पीछे नहीं हटेगा।
सतबीर पहलवान ने कहा कि जो किसान हित में बड़ी-बड़ी बातें करते थे। किसान के नाम पर वोट लेते थे उन नेताओं के चेहरे सबके सामने आ चुकी है। जो किसान के साथ नहीं है उनका किसानों को पता चल गया है। अब किसान समझदार हो चुका है कि वो बहकावे की बातों में नहीं आएगा। सर छोटूराम ने दो बातें कही थी कि किसान अपने-पराए का फर्क जाने, अच्छे-बुरे को पहचाने। किसान अब दोनों बातों को जान चुका है। सत्ता सारी उम्र नहीं रहती थी। जो सत्ता में बैठकर काले कानून के पक्ष में है समय आने पर किसान उनको सत्ता से बाहर करने का काम करेंगे। इस मौके पर ऊषा, इंद्रावति, एडवोकेट मनोज श्योकंद, शीला जुलानी, विकास श्योकंद सफा खेड़ी, मनोज कुमार बरसोला, रोशनी, कमला जुलानी, सीमा बद्दोवाला, अमरजीत, जयप्रकाश, सूजरमल, अमीष, बिजेंद्र सिंधु, राकेश, अनूप मौजूद रहे।

No comments:

Post a Comment