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Friday, May 7, 2021

लापरवाही छोड़ें... अपनों का चेहरा तक देखना नसीब नहीं हो रहा

लापरवाही छोड़ें... अपनों का चेहरा तक देखना नसीब नहीं हो रहा

नारनौल : हिंदू रीति रिवाज में यह हमारी परम्परा है। लेकिन मैं मजबूर हूं कोविड गाइडलाइन यह नहीं कहती कि कोरोना से मृत्यु हो जाने के बाद उसके शव को पालीथिन से भी बाहर निकालो। मैं नहीं चाहता कि कोरोना का फैलाव हो। मेरी ओर से माफी। आप दूर चली जाए हम नियम में बंधे हुए है। श्मशान घाट में चेहरा नहीं दिखाने की बात को लेकर महिला के आगे हाथ जोड़ते ईओ अभयसिंह।  

 नारनौल गांव हो या शहर। लापरवाही की हद है। रोजाना कोरोना संक्रमितों और उससे होने वाली मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है। अपनों का चेहरा तक देखना नसीब नहीं हो रहा है। यह तस्वीर नारनौल शहर के रेवाड़ी रोड स्थित स्वर्ग आश्रम की गुरुवार करीब साढ़े तीन बजे की है। नगर परिषद के ईओ अभयसिंह यादव व एक्सईएन अंकित वशिष्ठ यहां मौजूद थे। इस स्वर्ग आश्रम के अंदर खुले आसमान के नीचे पीपीई किट पड़ी होने की तस्वीरें वायरल होने पर हरिभूमि टीम पहुंची थी। उस वक्त ईओ ने हरिभूमि को बताया कि यह आज की चौथी डेडबॉडी है। पांचवीं का मैसेज पहले ही आया हुआ है। इसी बातचीत के दौरान चौथी डेडबॉडी के परिजन ईओ के पास पहुंचे। 'परिजनों ने रोते हुए दुहाई दी कि आपके कहने पर पांच से ज्यादा लोग भी अंतिम संस्कार में नहीं आए। जिसने हमें पाल-पोस कर इतना बड़ा किया था कम से कम उसका चेहरा तो देख लेने दो। वरना जीवनभर मलाल रहेगा। महिला की भावनाओं को समझते हुए ईओ ने मार्मिक भाव से हाथ जोड़ लिए और कहा कि मैं आपकी भावनाओं का पूरा मान-सम्मान करता हूं। हिंदू रीति रिवाज में यह हमारी परम्परा है। लेकिन मैं मजबूर हूं कोविड गाइडलाइन यह नहीं कहती कि कोरोना से मृत्यु हो जाने के बाद उसके शव को पालीथिन से भी बाहर निकालो। मैं नहीं चाहता कि कोरोना का फैलाव हो। मेरी ओर से माफी। आप दूर चली जाए हम नियम में बंधे हुए है। यह शब्द सुनकर महिला रोते हुए उनके पास से चली गई।' कम से कम इस तस्वीर में दिख रही भावनाओं व भाव को देख व सम­झाकर लापरवाही छोड़े दें।
अंतिम क्रिया के बाद श्मशान भूमि में ही पीपीई किट छोड़ रहे लोग जहां देशभर में कोरोना संक्रमण के कारण लगातार कई मौतें हो रही हैं, वहीं नारनौल से कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जिन्हें देखकर लोगों की लापरवाही का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। बात शहर में रेवाड़ी रोड स्थित स्वर्ग आश्रम की है, गुरुवार जब एक परिवार अस्थियाें के लिए वहां पहुंचा तो हैरान हो गया, वहां खुले में पीपीई किट पड़ी दिखाई दी। किसी ने यह तस्वीर क्लिक की और सोशल मीडिया पर वायरल कर दी। इस्तेमाल की जा चुकी इन पीपीई को निस्तारण नहीं करने से संक्रमण बढ़ने का खतरा बढ़ गया है। वैसे तो नियमानुसार कोविड पॉजिटिव शव के अंतिम संस्कार और पीपीई किट को डिस्पोज करने की जिम्मेदारी नगर परिषद की है, लेकिन लोगों का सहयोग नहीं मिलने का खामियाजा अन्य लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

क्या कहते है सीएमओ इस संबंध में सीएमओ डा. अशोक का कहना है कि कोविड प्रोटोकाल के अनुसार ही संक्रमित व्यक्ति का अंतिम संस्कार किया जाना चाहिए। अगर कहीं पीपीई किट छोड़ी गईं तो उनका निस्तारण किया जाना चाहिए। खुले में पीपीई किट छोड़ने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। क्या कहते है ईओ नगर परिषद के ईओ अभयसिंह यादव ने बताया कि अंतिम संस्कार के दौरान क्रियाक्रम करने के लिए मृतक के परिजन को भी पीपीई किट पहनाई जाती है। हमारे कर्मचारी भी पीपीई किट में होते है। लोग पीपीई किट श्मशाम भूमि में भी किसी कोने में उतार निकल रहे है। इस तरह की सूचना मिली तो मौका मुआयना कर सख्त हिदायत दी गई है

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