September 21, 2026
इस बार 15 की बजाए 14 दिन का रहेगा पितृ पक्ष ,10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या श्राद्ध के लिए खास : नवीन शास्त्री
इस बार 15 की बजाए 14 दिन का रहेगा पितृ पक्ष
27 सितंबर से शुरू हो कर 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या पर समाप्त होंगे श्राद्ध
30 सितंबर को चतुर्थी और पंचमी का श्राद्ध एक ही दिन
10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या श्राद्ध के लिए खास : नवीन शास्त्री
जींद : पितृ पक्ष की शुरुआत हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से होती है। इस बार पितृ पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर (पूर्णिमा श्राद्ध) से हो रही है। जबकि मुख्य प्रतिपदा श्राद्ध 27 सितंबर (रविवार) से शुरू होगा और इसका समापन 10 अक्टूबर (सर्वपितृ अमावस्या) को होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष 15 दिन के होते हैं लेकिन इस वर्ष पितृ पक्ष कुल 14 दिनों का रहेगा। सबसे खास बात यह है कि 30 सितंबर को चतुर्थी और पंचमी का श्राद्ध एक ही दिन पड़ रहा है।
29 सितंबर को भरणी श्राद्ध और सात अक्टूबर को महा श्राद्ध का विशेष महत्व है। सर्वपितृ अमावस्या के दिन उन सभी पितरों का श्राद्ध और तर्पण किया जा सकता है, जिनकी मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं है या जिनका श्राद्ध किसी कारणवश निर्धारित तिथि पर नहीं हो पाया है।
इस बार 15 की बजाए 14 दिन का रहेगा पितृ पक्ष
पितृ पक्ष में पूर्वजों की मृत्यु की तिथि के अनुसार उनका श्राद्ध किए जाने की परंपरा है। जिन लोगों की मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं होती है और उन लोगों का श्राद्ध अमावस्या तिथि के दिन किया जाता है। इस दौरान श्राद्ध कर्म या पिंडदान करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। पितृ पक्ष में ब्राह्मण या जरूरतमंद को अन्न, धन्न और वस्त्र का दान करना चाहिए। वैसे तो हर बार पितृ पक्ष के 15 दिन पितरों को समर्पित होते हैं लेकिन इस बार पितृ पक्ष 14 दिन के होंगे। इस दौरान श्राद्ध कर्म, दान, गरीबों को खाना खिलाने से पितरों की आत्माएं प्रसन्न होती हैं। चतुर्थी और पंचमी एक ही दिन 30 सितंबर बुधवारद्ध को पड़ रही हैं। ऐसे में जिन पितरों का निधन चतुर्थी या पंचमी तिथि को हुआ होए,उनके लिए इसी दिन श्राद्ध कर्म करना चाहिए।
तिथि अनुसार श्राद्ध कैलेंडर
27 सितंबर (रविवार) प्रतिपदा श्राद्ध
28 सितंबर (सोमवार) द्वितीया श्राद्ध
29 सितंबर (मंगलवार) तृतीया व भरणी श्राद्ध
30 सितंबर (बुधवार) चतुर्थी व पंचमी श्राद्ध
1 अक्टूबर (वीरवार) षष्ठी श्राद्ध
2 अक्टूबर (शुक्रवार) सप्तमी श्राद्ध
3 अक्टूबर (शनिवार) अष्टमी श्राद्ध
4 अक्टूबर (रविवार) नवमी श्राद्ध
5 अक्टूबर (सोमवार) दशमी श्राद्ध
6 अक्टूबर (मंगलवार) एकादशी श्राद्ध
7 अक्टूबर (बुधवार) द्वादशी व महा श्राद्ध
8 अक्टूबर (वीरवार) त्रयोदशी श्राद्ध
9 अक्टूबर (शुक्रवार) चतुर्दशी श्राद्ध
10 अक्टूबर (शनिवार) सर्वपितृ अमावस्या
श्राद्ध कर्म की सही विधि
श्राद्ध वाले दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थल को साफ कर पितरों का स्मरण करते हुए संकल्प लें। पारिवारिक परंपरा के अनुसार पितरों के निमित्त तर्पण और पिंडदान करें। ब्राह्मण भोजन में गाय, कौए व कुत्ते को भी खिलाएं। इसके बाद ब्राह्मण को आदरपूर्वक भोजन करवाएं और दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लें।
10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या श्राद्ध के लिए खास : नवीन शास्त्री
जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि इस बार पितृ पक्ष 14 दिन का है। 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या है, जोकि पितरों के श्राद्ध के लिए खास है। इस दिन किए गए श्राद्ध से पितरों की आत्मा को मोक्ष प्राप्त होता है। पितृ पक्ष में पूर्वजों का स्मरण सिर्फ धार्मिक कर्म नही बल्कि अपनी जड़ों से जुडऩे का माध्यम भी है।