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Friday, September 18, 2020

रोष:पीटीआई और आशा वर्कर्स ने किया डिप्टी सीएम के आवास का घेराव, पुलिस ने गेट से दूर ही रोके रखा

रोष:पीटीआई और आशा वर्कर्स ने किया डिप्टी सीएम के आवास का घेराव, पुलिस ने गेट से दूर ही रोके रखा

पिछले एक सप्ताह के दौरान किसान, पीटीआई और मजदूर और आशा वर्करों के प्रदर्शन की गति ने तेजी पकड़ ली है। तीनों ही वर्ग से रोजाना कभी डिप्टी सीएम तो कभी बिजली मंत्री के आवास का घेराव करके प्रदर्शन और नारेबाजी की जा रही है। गुरुवार को एक बार फिर आशा वर्कर और पीटीआई अपनी मांग को लेकर डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला की कोठी पर पहुंचे और घेराव करके नारेबाजी की। करीब 50 मिनट तक प्रदर्शन चलता रहा। इस दैारान कोठी की सुरक्षा में भारी पुलिसबल तैनात रहा। प्रदर्शन लंबा ना चले इसके लिए एसडीएम जयवीर यादव ज्ञापन दिलाने के लिए पहुंचे हुए थे।

मगर पीटीआई और आशा वर्कर ने जेजेपी नेताओं को ज्ञापन नहीं दिया। आखिर में उन्होंने एसडीएम जयवीर यादव को ही ज्ञापन सौंपा और प्रदर्शन खत्म किया। डिप्टी सीएम के आवास आगे जब दोपहर को धरना देकर प्रदर्शन किया जा रहा था। इस दौरान कड़ी धूप पड़ रही थी। गर्मी के चलते कुछ महिलाएं जिनमें आशा और पीटीआई शामिल थी। वे डिप्टी सीएम की कोठी के दीवार के पास आकर बैठ गई। भीड़ को कोठी की ओर बढ़ती देख महिला पुलिस कर्मियों ने मोर्चा संभाला और उन्हें वहां से खड़ा करना शुरू कर दिया। इस पर कुछ महिलाओं ने पुलिस को खरी खोटी भी सुनाई।

विरोध में इन संगठनों ने दिखाई एकता

घेराव करने वालों में आशा यूनियन, मिड डे मिल यूनियन, आंगनबाड़ी वर्कर्स एंड हैल्पर यूनियन, बिजली यूनियन, रोडवेज यूनियन, रिटायरमेंट कर्मचारी संघ, सुपरवाइजर वेलफेयर एसोसिएशन, नगर पालिका, फायर यूनियन, अध्यापक संघ सहित अन्य संगठनों के कर्मचारी शामिल थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पीटीआई नेता कुलवंत सिंह, सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान मदन लाल खोथ व जिला सचिव राजेश भाकर ने संयुक्त रूप
से की।

सीएम से वार्ता के लिए आशा वर्कर्स ने भी सौंपा ज्ञापन

अपनी मांगों को लेकर पिछले 7 अगस्त से हड़ताल पर चल रही आशा वर्कर्स ने गुरुवार को सीएम से वार्ता करवाने के लिए डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला के नाम एक ज्ञापन सौंपा। डिप्टी सीएम को ज्ञापन सौंपने पहुंची जिला प्रधान कलावती माखोसरानी व जिला सचिव सिलोचना ने बताया कि 7 अगस्त से लगातार उनका धरना चल रहा है, लेकिन अभी तक सरकार ने कर्मचारियों से बातचीत करना मुनासिब नहीं समझा है। उनकी जायज मांगों को भी सरकार मानने को तैयार नहीं है।

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