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Saturday, February 20, 2021

लंबा चलेगा किसान आंदोलन, अब गर्मी की तैयारी में पहुंच रहे कूलर, फ्रिज और वाटर कूलर, देखिये तस्वीरें

लंबा चलेगा किसान आंदोलन, अब गर्मी की तैयारी में पहुंच रहे कूलर, फ्रिज और वाटर कूलर, देखिये तस्वीरें




नई दिल्ली : कृषि कानूनों को लेकर हो रहे किसान आंदोलन का प्रदर्शन स्थल रहा सिंघु बॉर्डर पर जहां एक बार 26 जनवरी को हुई हिंसा के बाद सुनसान हो गया था, वहां अब फिर से रंग जमने लगा है। किसान अपने ट्रैक्टर और ट्राली लेकर धरनास्थल पर लौट रहे हैं।


वहीं गर्मी के मौसम को देखते हुए किसानों ने अपनी ट्रालियों में पंखे और छोटे कूलर भी लगाना शुरू कर दिया है। प्रदर्शन स्थल पर सुनसान हुए पंडाल, लंगर और मंच की रौनक फिर से लौटने लगी है। ठंड के बाद गर्मी से बचने के लिए भी किसानों ने खास तैयारियां शुरू कर दी हैं।

ठंड के चलते हर जगह से बंद किए गए पंडाल को खोला जा रहा है, ताकि ताजी हवा लोगों को मिलती रहे और गर्मी से राहत मिल सके। किसानों को हर समय ठंडा पानी मिलता रहे इसके लिए हर जत्थे में ठंडे पानी के जार और ठंडे पानी की बोतलें पहुंचाने की व्यवस्था शुरू हो गई है।

यूनाइटेड सिख एनजीओ के डायरेक्टर प्रीतम सिंह ने अमर उजाला को बताया कि गर्मी के चलते किसानों ने अपने ट्रैक्टर और ट्रालियों में कूलर और लटकने वाले पंखे लगाना शुरू कर दिया है। बड़ी संख्या में किसान हमारे पास कूलर और पंखों की मांग लेकर पहुंच रहे हैं।


हमारी टीम ने किसानों को पंखे और छोटे कूलर उपलब्ध करवाने के लिए सर्वे करना शुरू कर दिया हैं। सर्वे पूरा होने के बाद हम किसानों को पंखे और कूलर उनके जत्थों के लिए उपलब्ध करवाएंगे।
हरियाणा के किसान नेता रविंद्र राणा ने अमर उजाला से कहा हम लोगों ने करीब एक हजार छोटे कूलर अपने स्तर पर मंगवाए हैं। अगले सप्ताह तक सभी कूलर सिंघु बॉर्डर तक पहुंच जाएंगे। इसके बाद हम महिलाओं और बुजुर्गों के जत्थों में सबसे पहले इसे लगवाएंगे। इसके बाद ट्रैक्टर और ट्राली में अन्य किसानों को देंगे।

जहां तक पानी का सवाल है हम लोग हजारों छोटी पानी की बोतलें रोज आम लोगों और किसानों के बीच बांट रहे है। जैसे-जैसे गर्मी बढ़ेगी पानी की बोतलें ज्यादा संख्या में मंगवाकर लोगों में बांटेंगे, ताकि पानी के कारण किसी को कोई परेशानी नहीं हो।

प्रदर्शन स्थल पर दोबारा से किसानों की भीड़ बढ़ने के बाद सभी जगह की लंगर सेवा फिर से शुरू हो गई है। इसके अलावा जगह-जगह किसानों के जत्थों को भी पहले की तरह खाना खिलाना शुरू कर दिया है। किसानों के स्वास

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