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Saturday, May 8, 2021

भाजपा सरकार दुष्यंत चौटाला को मोहरा बना कर आए दिन किसानों को भडकाने को प्रयास कर रही है- होशियार सिंह

भाजपा सरकार दुष्यंत चौटाला को मोहरा बना कर आए दिन किसानों को भडकाने को प्रयास कर रही है- होशियार सिंह            

-बदोवाला टोल प्लाजा पर चल रहा 135वें दिन में प्रवेश
जींद /नरवाना : बदोवाल टोल प्लाजा पर चल रहे धरने का शनिवार को 135वां दिन था। किसान नेताओं ने धरने को सम्बोधित करते हुए कहा कि अगर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत सिंह चौटाला को सरकार ने किसानों को भड़काने के लिए तैयार कर लिया है तो सरकार भी यह जान ले कि भाजपा-जजपा का कोई भी नेता जींद जिले में कदम नहीं रख सकता और वह कोई नेता आ भी जाता है तो उसका विरोध करने के लिए लाखों की संख्या में किसान मौजूद रहेंगे। किसान नेता होशियार सिंह ने कहा कि शुक्रवार को उपमुख्यमंत्री दुष्यंत सिंह चौटाला जींद में पहुंचना था लेकिन दुष्यंत चौटाला से पहले उनका विरोध करने के लिए लाखों की संख्या में किसान जींद के रेस्ट हाउस के बाहर पहुंच गए थे। जिसके बाद प्रशासन द्वारा कई बार गेट लगाकर किसानों को रास्ते में रोकने का प्रयास किया गया लेकिन किसान शांतिपूर्ण तरीके से अपना प्रदर्शन करते हुए जीन्द केपीडब्ल्यू रेस्टहाउस तक पहुंचे और वहां अपना विरोध प्रदर्शन शुरू किया। इस दौरान भारी पुलिस बल भी सरकार द्वारा जींद में तैनात किया गया थे। जिससे सरकार के लोगों की धज्जियां खुद प्रशासन ही उड़ाता दिखा किसान नेता ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा कई बार आह्वान कर चुका है कि किसान आंदोलन के जारी रहने तक बीजेपी का कोई भी नेता किसी भी प्रकार का कार्यक्रम आयोजित ना करें अन्यथा उसका अंजाम बुरा ही होगा।
होशियार सिंह ने कहा कि भाजपा की सरकार ने अब दुष्यंत सिंह चौटाला को अपना मोहरा बना लिया है जो आए दिन प्रदेश में कहीं ना कहीं जाकर किसानों को भड़काने का प्रयास करते हैं ताकि किसानों के आंदोलन को बदनाम करके उसे आसानी से तोड़ा जा सके। लेकिन किसान पिछले कई महीनों से जिस प्रकार शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन चला रहे हैं उसी प्रकार आंदोलन जारी रहेगा क्योंकि खेत में खेती करना हमारा धर्म है और जब हमसे हमारी खेती ही छीन ली जाएगी तो हम अपने ही खेतों में मजदूरी करने की वजह और कुछ नहीं कर सकेंगे इसलिए अपनी मां समान खेती को बचाने के लिए किसान हर कुर्बानी देने के लिए तैयार हैं और तब तक आंदोलन में डटे रहेंगे जब तक तीनों ने किसी कानून केंद्र की सरकार वापिस नहीं कर देती क्योंकि यह तीनों कृषि कानून किसान नहीं बल्कि बड़े कारपोरेट के हितेषी हैं।

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