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Sunday, September 5, 2021

September 05, 2021

9 राज्यों से किसान आज मुजफ्फरनगर पहुंचेंगे

9 राज्यों से किसान आज मुजफ्फरनगर पहुंचेंगे, हरियाणा से भी काफिले रवाना
नई दिल्ली : संयुक्त किसान मोर्चा 9 महीनों से दिल्ली की सीमाओं पर नए कृषि कानूनों के खिलाफ चलाए जा रहे आंदोलन को उत्तर प्रदेश से नई धार देने जा रहा है। 5 सितंबर यानी रविवार को मुजफ्फरनगर में किसानों की पहली महापंचायत होगी। संयुक्त किसान मोर्चा इसे ऐतिहासिक बनाना चाहता है। किसान नेताओं का दावा है कि महापंचायत में देशभर से 5 लाख से ज्यादा किसान पहुंचेंगे। जितने बड़े दावे हैं, आयोजन को लेकर उतने ही बड़े इंतजाम किए गए हैं।
महापंचायत को अब तक के सबसे बड़े किसान आंदोलन के रूप में प्रचारित जा रहा है। खाने से लेकर रहने तक और करीब 3 लाख वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था की गई है। भाकियू ने 10 हजार वॉलंटियर्स तैनात किए हैं। रैली में शनिवार रात 1 बजे तक काफी भीड़ जुट गई। बता दें कि जीआईसी के मैदान पर महापंचायत होनी है। यहां किसान नेताओं की आवाजाही और पुलिस प्रशासनिक अफसरों की आमद 24 घंटे से जारी है। सब अपनी व्यवस्थाओं के खाके खींच रहे हैं। किसानों की तादाद और यहां लिए जाने वाले फैसले का इंतजार है।
टिकैत के बेटे गौरव टिकैत कहते हैं- ‘महाराष्ट्र, बिहार, बंगाल, हरियाणा, तेलंगाना, राजस्थान, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और गुजरात से किसान यहां पहुंचेंगे। अलग धर्म, भाषा, जाति और राज्यों के किसान इस धरती से भाईचारे का संदेश देंगे।’ याद रहे कि सितंबर के महीने में 8 साल पहले मुजफ्फरनगर का सांप्रदायिक माहौल बिगड़ा था। इन सबके बीच शुगर बाउल कहे जाने वाले पश्चिमी यूपी में इन दिनों गन्ना किसानों के बकाया भुगतान का मुद्दा खूब उछल रहा है। ऊपर से अक्टूबर से चीनी मिलों में नए पेराई सीजन की शुरुआत होनी है।
चुनावी बेला में राज्य सरकार को ऐसी कई चुनौतियों का सामना करना है और आंदोलित किसानों के पास प्रेशर पॉलिटिक्स के लिए यही उचित समय है। इससे निकले संदेश का पश्चिमी यूपी के सियासी समीकरणों पर खासा असर होगा। सियासत के जानकार मान रहे हैं कि 2022 के यूपी चुनाव की फसल के बीज किसान यहीं पर बोएंगे। 2017 के विधानसभा और बीते दो लोकसभा चुनाव में भाजपा से करारी शिकस्त खा चुके विपक्षी दल आंदोलन में ढाल बने हुए हैं। चौधरी अजित सिंह के बाद उनके बेटे जयंत चौधरी अपनी पार्टी राष्ट्रीय लोकदल के लिए इसे स्वर्णिम काल से कम नहीं देख रहे हैं। महापंचायत इस दिशा में निर्णायक साबित होगी।

हरियाणा के किसान 33 साल बाद यूपी जाकर निभाएंगे भाईचारा, ट्रैक्टर लेकर रवाना
नई दिल्ली : /जींद/राई : हरियाणा के किसानों ने मुजफ्फरनगर के लिए कूच कर दिया है। किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से रवाना हो गए हैं। यह संयोग 33 साल बाद बन रहा है, जब हरियाणा के किसान यूपी जाकर भाईचारा निभाएंगे। भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष रतनमान बताते हैं कि 1988 में हरियाणा से चौ. घासीराम नैन की अगुवाई में किसान यूपी गए थे। यूपी के बाद किसानों ने नई दिल्ली कूच किया था।
इसके बाद एमएस टिकैत समेत कई किसान नेताओं ने हरियाणा में हुए किसान आंदोलन में बढ़चढ़कर भाग लिया था। अब फिर से किसान अपनी मांगाें को लेकर हुंकार भर रहे हैं। शनिवार सुबह 8 बजे से केजीपी व मेरठ रोड से हरियाणा-पंजाब के किसान ट्रैक्टर-ट्राॅलियों और कारों के काफिले के साथ मिशन यूपी के लिए रवाना हुए, जबकि रविवार सुबह भी बड़ी संख्या में किसान कूच करेंगे। हरियाणा से करीब 200 खाप/तपों व बारहा के किसान भी यूपी पहुंच रहे हैं।

Thursday, July 1, 2021

July 01, 2021

किसान नेता राकेश टिकैत का बड़ा बयान- मंच पर दिखे तो बीजेपी वालों के बक्कल उतार दिए जाएंगे

किसान नेता राकेश टिकैत का बड़ा बयान- मंच पर दिखे तो बीजेपी वालों के बक्कल उतार दिए जाएंगे

नई दिल्ली : तीनों कृषि कानूनों को लेकर केन्द्र सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों और बीजेपी कार्यकर्ताओं में बुधवार को तीखी झड़प हुई। पूरा मामला उस समय का है जब गाजीपुर बार्डर पर बीजेपी कार्यकर्ता अपने एक नेता के स्वागत के लिए आएं हुए थे। इस दौरान वहां दोनों पक्षों में जमकर बवाल हुआ।
किसान नेता राकेश टिकैत ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि अगर बीजेपी कार्यकर्ता मंच के आसपास भी नजर आएं तो एक-एक के बक्कल उतार दिए जाएंगे। यह संयुक्त किसान मोर्चा का मंच है,इस पर कब्जा करने के प्रयास करने वालों को किसी भी सूरत में छोड़ा नहीं जाएगा।
एक न्यूज चैनल से बातचीत में जब राकेश टिकैत से पुछा गया कि सड़क तों सबकी है तो उन्होंने कहा कि इसका यह मतलब यह नहीं है कि कोई भी मंच पर कब्जा करने की कोशिश करें। झण्डा लगाकर मंच पर कब्जा करने की कोशिश करने वालों को अच्छा सबक सिखा दिया जाएगा।
टिकैत ने कहा कि मंच पर कब्जा करके किसी का स्वागत करने का मतलब क्या है. अगर मंच से इतना ही प्यार है तो इसमें शामिल क्यों नहीं हो जाते। यह सब कुछ पुलिस की मौजूदगी में हुआ है। बीजेपी कार्यकर्ता यह दिखाना चाहते थे कि उन्होंने किसानों के मंच पर कब्जा करके अपने नेता का स्वागत किया है।
काले झंडे दिखाने को लेकर जब राकेश टिकैत से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि अगर कोई दूसरा अपना झंडा लेकर आएगा तो क्या उन्हें काला झंडा भी नहीं दिखाएं।
गाड़ियों के साथ तोड़फोड़ की बात से किसान नेता राकेश टिकैत ने साफ इंकार किया। उन्होंने कहा कि पिछले सात महीनों से यहां से लाखों गाड़ियां निकली है, कभी किसी ने शिकायत दर्ज कराई कि किसानों ने हमारी गाड़ी को पत्थर मारा है। ये काम बीजेपी कार्यकर्ताओं ने खुद किया है और दोष किसानों के सिर मढ़ रहे हैं।

Saturday, June 26, 2021

June 26, 2021

पानीपत पहुंचे डिप्टी CM को दिखाए काले झंडे

पानीपत पहुंचे डिप्टी CM को दिखाए काले झंडे, दुष्यंत चौटाला बोले- पीसफुल प्रोटेस्ट सभी का अधिकार, विपक्ष में हमने भी किए हैं
पानीपत : डिप्टी CM दुष्यंत चौटाला के बुधवार को पानीपत पहुंचने पर विरोध में काले झंडे दिखाए गए। लघु सचिवालय में जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में शामिल होने जा रहे डिप्टी CM के काफिले को किसानों ने काले झंडे दिखाकर विरोध किया। इसपर डिप्टी CM ने कहा कि पीसफुल प्रोटेस्ट सभी का अधिकार है। मीटिंग के दौरान उन्होंने कुल 31 लोगों की समस्याएं सुनकर संबंधित अधिकारियों को निवारण के आदेश दिए हैं। सबसे अधिक मामले पुलिस महकमे से जुड़े हुए आए।

लघु सचिवालय में कष्ट निवारण समिति की बैठक में समस्या सुनते डिप्टी CM
पानीपत में एक साल बाद बुधवार को जिला कष्ट निवारण की मीटिंग आयोजित की गई। डिप्टी CM दुष्यंत चौटाला ने मीटिंग की अध्यक्षता की। 11:22 बजे डिप्टी CM का हेलीकॉप्टर आर्य कॉलेज के मैदान पर उतरा। यहां पहले से ही DC धर्मेंद्र सिंह, SP शशांक कुमार सावन, जजपा जिलाध्यक्ष सुरेश काला, पूर्व जजपा प्रत्याशी देवेंद्र कादियान समेत अन्य समर्थकों ने उनका स्वागत किया। यहां से डिप्टी CM का काफिला लघु सचिवालय की ओर बढ़ा।
लघु सचिवालय के सामने फ्लाईओवर के नीचे भारतीय किसान यूनियन और काले झंडे लिए पहले से खड़े किसानों ने उन्हें काले झंडे दिखाए। हालांकि काफी संख्या में मौजूद पुलिस बल ने किसानों को हाईवे पर नहीं आने दिया। मीटिंग से लौटने के दौरान भी किसानों ने काले झंडे दिखाकर विरोध दर्ज किया।

पीसफुल प्रोटेस्ट सभी का अधिकार
मीटिंग के बाद डिप्टी CM से किसानों की नाराजगी और काले झंडे दिखाने के संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि पीसफुल प्रोटेस्ट सभी का अधिकार है। कहा कि विपक्ष में रहने के दौरान उन्होंने भी प्रोटेस्ट किए हैं।
पंजाब जैसी घटना हमारे प्रदेश में होती तो देशभर में कड़ा संदेश दिया जाता
पंजाब में भाजपा विधायक के साथ मारपीट और कपड़े फाड़ने पर बोले कि इस प्रकार की घटना हरियाणा में हुई होती तो कार्रवाई से पूरे देश में कड़ा संदेश दिया जाता। इस घटना को उन्होंने पंजाब सरकार और पंजाब पुलिस का फेलियर बताया।

कहां गए 40 नेता?
डिप्टी CM ने कहा कि 40 नेताओं ने हजारों किसानों को विरोध के लिए उकसाया है। अब उन 40 नेताओं का कहीं अता-पता नहीं है। उन्होंने कहा कि किसानों का यह मुद्दा केवल चर्चा से हल होगा और केंद्र सरकार चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन 40 नेताओं का पता नहीं लग रहा।

फसल का एक-एक दाना खरीदा जाएगा
डिप्टी CM ने कहा कि सरसों और गेहूं की खरीद एक अप्रैल से शुरू होगी। किसानों की फसल का एक-एक दाना खरीदा जाएगा और जे फार्म एक्सेप्ट होने के 24 घंटे के अंदर किसानों के खातों में भुगतान किया जाएगा। भुगतान में 48 से 72 घंटे होने पर 9% के ब्याज के साथ भुगतान होगा।

*कष्ट निवारण मीटिंग में सुनी 31 समस्याएं*
कष्ट निवारण समिति की मीटिंग में भावुक होकर समस्या सुनाता पीड़ित।
कष्ट निवारण समिति की मीटिंग में भावुक होकर समस्या सुनाता पीड़ित।
करीब दो घंटे चली कष्ट निवारण समिति कर मीटिंग में डिप्टी CM ने कुल 31 लोगों की समस्याएं सुनी। इनमें पहले से प्रस्तावित 7 नई, 6 लंबित और 3 CM विंडो से प्राप्त शिकायतें थीं। इनके अलावा लोगों ने व्यक्तिगत रूप से भी CM को समस्याओं से अवगत कराया। सबसे अधिक मामले पुलिस महकमे से जुड़े रहे। डिप्टी CM ने सभी शिकायतों के निस्तारण के लिए संबंधित अधिकारियों की समिति बनाकर जल्द निपटारे के आदेश दिए हैं।

*रोजगार मांगने पहुंचे युवक को मुद्रा लोन*
कष्ट निवारण समिति की मीटिंग में ITI पास एक युवक रोजगार मांगने पहुंचा। युवक ने खुद को इलेक्ट्रिशियन से पास आउट बताया तो डिप्टी CM ने रोजगार के स्थान पर स्वरोजगार की सलाह दी और संबंधित अधिकारी से युवक को मुद्रा लोन देने के आदेश दिए।​​​​​​

*विरोध के चलते तीन बार रद्द हो चुकी थी मीटिंग*
कष्ट निवारण समिति की मीटिंग करीब एक साल बाद हुई है। किसानों के विरोध को देखते हुए हाल ही में तीन बाद मीटिंग को रद्द करना पड़ा।​ बीती 26 मार्च को भी मीटिंग निर्धारित थी, लेकिन भारत बंद और किसानों के विरोध के कारण मीटिंग रद्द कर दी गई थी।
June 26, 2021

चप्पल बनाने वाली फैक्ट्री में लगी आग

चप्पल बनाने वाली फैक्ट्री में लगी आग; कर्मचारियों और मजदूरों ने भागकर बचाई जान, आसमान में छाया काला धुआं
बहादुरगढ़ : हरियाणा के बहादुरगढ़ जिले में चप्पल बनाने वाली एक फैक्ट्री में शनिवार की दोपहर अचानक भीषण आग लग गई। आग लगते ही श्रमिक जान बचाने के लिए बाहर की तरफ दौड़े। ग्राउंड फ्लोर से कुछ कच्चा सामान निकालकर बचाया गया, बाकी सब राख हो गया। पहले और दूसरे फ्लोर तक आग फैल गई थी। दोपहर करीब 12 बजे फैक्ट्री में आ लगी थी।
उस वक्त फैक्ट्री में 100 से ज्यादा कर्मचारी काम कर रहे थे। आग का पता लगने पर कर्मचारी बाहर की ओर भागे। प्राथमिक सूचना के अनुसार, मशीन ऑयल के रिसाव के कारण आग लगी। फैक्ट्री वर्करों के मुताबिक, ग्राउंड फ्लोर पर पहले आग लगी। लपटें उठती देख फैक्ट्री कर्मचारियों ने पहले अपने स्तर पर आग पर काबू पाने का प्रयास किया।
इसके बाद हालात काबू से बाहर होते देखकर दमकल विभाग को सूचना दी गई। सूचना मिलने पर दमकल विभाग की चार गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। तब तक आग पहले और दूसरे फ्लोर को भी चपेट में ले चुकी थी। आग के चलते लाखों रुपए के नुकसान का अंदेशा है। आसपास रहने वाले लोगों को दिक्कतों का सामना अलग से करना पड़ा।
June 26, 2021

राकेश टिकैत हुए गिरफ्तार…ऐसा सुन कहीं न हो जाए हंगामा, दिल्ली पुलिस को जल्दी जारी करना पड़ा यह बयान

राकेश टिकैत हुए गिरफ्तार…ऐसा सुन कहीं न हो जाए हंगामा, दिल्ली पुलिस को जल्दी जारी करना पड़ा यह बयान
 तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में पैदा हुआ किसान आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है। 7 महीने का समय बीत चुका है और यह किसान आंदोलन ज्यों का त्यों बना हुआ है। 26 नवंबर 2020 से किसान आंदोलन की शुरुवात हुई थी। इसलिए अब हर महीने की 26 तारीख को आंदोलनकारी किसान अपना रोष व्यक्त कर रहे हैं।
आंदोलनकारी किसानों का कहना है कि वह ऐसा कर केंद्र सरकार को यह बार-बार याद दिलाना चाहते हैं कि किसान आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ और न ही कमजोर हुआ है। इधर, जून की 26 तारीख को यानि आज जगह-जगह पर किसानों का रोष प्रदर्शन देखा जा रहा है। आंदोलनकारी किसान गवर्नर हाउस की तरफ कूच कर रहे हैं लेकिन उनको पुलिस, बल के साथ आगे बढ़ने से रोक रही है। इस दौरान संघर्ष जैसी स्थिति भी देखने को मिल रही है।
*खबर चली- राकेश टिकैत को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है….*
वहीं, किसान आंदोलन के नेता बन रखे राकेश टिकैत की इस रोष प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तारी की खबर चल पड़ी। कहा जाने लगा कि दिल्ली पुलिस ने राकेश टिकैत को गिरफ्तार कर लिया है। इस बारे में जब जानकारी दिल्ली पुलिस को हुई तो दिल्ली पुलिस ने देर न करते हुए फौरन एक बयान जारी किया और कहा कि राकेश टिकैत के बारे में गलत खबर चल रही है।उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया है। बतादें कि, राकेश टिकैत की गिरफ्तारी की बात सुन आंदोलनकारी किसानों द्वारा हंगामे का माहौल बन सकता था।
*DCP East Delhi द्वारा ट्वीट कर दी गई जानकारी…*

https://twitter.com/DCPEastDelhi/status/1408685637260087301?s=19

राकेश टिकैत गिरफ्तार नहीं हुए हैं, इसे बारे में DCP East Delhi द्वारा ट्वीट कर स्पष्ट जानकारी दी गई है| DCP East Delhi ने लिखा- “फर्जी खबर! राकेश टिकैत की गिरफ्तारी से संबंधित खबर झूठी है। कृपया ऐसी फर्जी खबरों/ट्वीट से दूर रहें। इस तरह की झूठी खबरें/ट्वीट फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

Saturday, June 19, 2021

June 19, 2021

टिकैत ने मीडिया पर साधा निशाना, बोले- इनके कैमरे किनके इशारे पर काम करते हैं, सबको पता है!

टिकैत ने मीडिया पर साधा निशाना, बोले- इनके कैमरे किनके इशारे पर काम करते हैं, सबको पता है!
नई दिल्ली : इसे देश का दुर्भाग्य न कहा जाए तो क्या कहा जाए। जो अन्नदाता कड़ी मेहनत से अन्न उपजाता है और देश का पेट भरता है। वो पिछले 7 महीने से खुले आसमान के नीचे धरना, प्रदर्शन पर बैठा हुआ है लेकिन सरकार के कान पर जूं भी नहीं रेंग रहा है।
सरकार समाधान की बजाय आंदोलन को बदनाम करने की कोशिशों में जुटी हुई है। कभी आंदोलन को खालिस्तानी बताया जाता है तो कभी पाकिस्तानी बता दिया जाता है लेकिन सरकार कभी बैठकर किसानों के दर्द को समझने को तैयार नहीं है।
आंदोलन के नेतृत्वकर्ता और भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार को मसले का समाधान खोजना चाहिए लेकिन सरकार आरोपों की खोज कर रही है जिससे की आंदोलन को बदनाम किया जा सके।
यह किस प्रकार का लोकतंत्र है जिसमें देश भर के किसान सात महीने से आंदोलन पर बैठे हुए हैं लेकिन सरकार तानाशाही रवैया अपनाए हुए है।
टिकैत ने साफ तौर पर कहा कि किसान किसी किस्म का संशोधन नहीं बल्कि पूरी तरह से इन कृषि कानूनों में बदलाव चाहता है।
हम पहले भी कहते रहे हैं और अब भी कह रहे हैं कि जब तक इन काले कृषि कानूनों को केंद्र सरकार वापस नहीं ले लेती, तब तक किसानों का आंदोलन जारी रहेगा।
राकेश टिकैत का कहना है कि ये तीनों कृषि कानून किसानों के लिए किसी डेथ वारंट से कम नहीं है।
उन्होंने कहा कि हमें पता है कि ये लड़ाई लंबी है लेकिन अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए भारत का किसान लंबी लड़ाई के लिए तैयार है. भारत सरकार को हर हाल में इन तीनों कृषि कानूनों को वापस लेना ही होगा।
किसान भी जिद पर अड़े हुए हैं। पंजाब, हरियाणा की मिट्टी का असर तो हम सब जानते ही हैं। बात खेत की हो या देश के सीमाओं की.. दुश्मनों के छक्के छुड़ाने में इन दोनों प्रदेशों के लोग सबसे आगे रहते हैं।
केंद्र की मोदी सरकार को लगता है कि ये किसान एक दिन थक कर भाग जाएंगे, पर अब तक ऐसा होता हुआ दिखाई नहीं दिया।
कड़ाके की ठंड के मौसम में इस आंदोलन की शुरुआत हुई थी। गर्मी और बरसात सब कुछ झेल लिया आंदोलनकारियों ने। आंदोलन की आंच अब तक कमजोर होती हुई नजर नहीं आ रही।
ये अलग बात है कि फिलहाल आंदोलन मीडिया के कैमरे की निगाहों से दूर है। मीडिया के कैमरे आजकल किनके इशारे पर चमकते हैं, ये तो आपको पता ही होगा !