Breaking

Showing posts with label चिन्तन- मंथन. Show all posts
Showing posts with label चिन्तन- मंथन. Show all posts

Monday, September 7, 2020

September 07, 2020

जानें श्राद्धों से जुड़े ये अनोखे तथ्य, क्यों मनाते हैं श्राद्ध ?

जानें श्राद्धों से जुड़े ये अनोखे तथ्य, क्यों मनाते हैं श्राद्ध ?

एक तरफ तो यह माना जाता है कि जब इंसान मरता है तो उसका पुनर्जन्म होता है.. मतलब अगर घर में किसी बुजुर्ग की मृत्यु हुई है तो वे अगले जन्म में कहीं पैदा हो गए होंगे। दूसरी तरफ श्राद्ध में पितरों को खिला कर हम यह सिद्ध करते हैं कि वह बेचारे कहीं भूख से तड़प रहे हैं पर उन्हें खीर हलवे की जरूरत है। अब यह सोचिए अगर तो उनका जन्म कहीं पर हो गया है तो उन्हें हमारा पहुंच दिया खाना नहीं पहुंचेगा। दूसरी बात अगर जन्म नहीं हुआ वह अभी भी ब्रह्मांड में घूम रहे हैं तो पुनर्जन्म की थ्योरी गलत हो जाती है। लेकिन कोई इस बात पर विचार ही नहीं करना चाहता!
घरों में सुख शांति समृद्धि के लिए श्राद्ध जरूरी है, यह कहकर हम सदियों से श्राद्ध कर रहे हैं। लेकिन क्या हमारे देश से गरीबी दूर हो गई ?ठीक है ,आप कहें कि एक तरह का दान ही है, अगर दान है तो कृपया जरूरतमंद को दीजिए। पंडितों को खिलाने से कोई फायदा नहीं( कृपया पंडित जन क्षमा करें) अब तो पंडित लोग भी श्राद्ध में परेशान हो जाते हैं।
अब इस के वैज्ञानिक कारण पर आते हैं जो कि बहुत ही उचित और सार्थक है। आप जानते हैं कि पितृ पक्ष पूर्णिमा से लेकर अमावस्या तक 15- 16 दिन का होता है और यह वर्षा ऋतु के बाद आता है.. परंतु पितृपक्ष मेँ कौवे को ही भोजन क्यों ?
आप ने कभी पीपल या बड का पेड लगाया?अथवा किसी को लगाते देखा?"नहीं।"यह दोनों पेड बीज के रोपने से नहीं उगते।ये दोनों अति उपयोगी पेड को उगाने की प्रकृति माँ ने अलग ही प्रबंध किया है।इनके बीजों को जब कौवे खाते हैं , तब उनके पेट में एक विशेष क्रिया से इनके बीजों में विशेष परिवर्तन होता है। जो बीजों को पेड़ उगने के लिए परिपक्व करता है।इसके सिवा और कोइ रीत नहीं है !फिर जहाँ कौवे बीट करते है वहाँ ये पेड उगते हैं ।
पीपल वह एकमात्र पेड है, जो सबसे अधिक प्राणवायु ( O2) देता है। पीपल ज्यादा ऑक्सीजन देने वाले पेड़ों में सबसे पहला स्थान रखता है। बड के गुण भी बहुत हैं। वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड खींचने और ऑक्सीजन देने की इसकी क्षमता बेजोड़ है। दवाओं में तो इसका बहुत ही ज्यादा प्रयोग होता है। ये दोनों पेड तभी तक रहेंगे जब तक कौवे रहेंगे। वर्षा ऋतु के बाद वे अँडे देते हैं। तो उनकी नयी पीढी के भोजन का उपयुक्त प्रबंध करने के लिए हमारे ऋषि मुनियों ने समाज में प्रथा डाली कि श्राद्ध में लोग छतों पर भोजन अवश्य रखें। उसके बीज पेड़ों को उगने में सहायक होंगे। ये हमारा प्रकृति रक्षण में सहयोग होगा। देखिए वह तब के समय में भी प्रकृति के प्रति कितने सजग थे?
मैंने बहुत से लोगों को श्राद्ध पर मजाक बनाते देखा है. अपनी परंपरा पर हँसे नहीं , सहर्ष पालन करें। सनातन धर्म जितना वैज्ञानिक और सार्थक कुछ भी नहीं, हर एक प्रथा, रिवाज के पीछे एक बहुत बड़ा तर्क और विज्ञान कार्य करता है!बस उस तर्क को जानने की जरूरत है। आज के बाद आपसे कोई पूछे कि आप लोग श्राद्ध क्यों करते हो? तो यह कारण बतलाएं कि आपके पूर्वजों ने प्रकृति की रक्षा के लिए एक महान व्यवस्था की है ना कि पितरों को खिलाने वाला। यह कौवे कोई हमारे पितृ बन कर नहीं हमारी प्रकृति के रक्षक बनकर आते हैं। इसलिए उन दिनों में इन्हें जरूर भोजन दें क्योंकि प्रकृति नहीं तो हम भी नहीं।

Monday, August 31, 2020

August 31, 2020

एक कहानी सुंदर सी - कर्म का सिद्धांत

 कर्म का सिद्धांत

       अस्पताल में एक एक्सीडेंट का केस आया ।

अस्पताल के मालिक डॉक्टर ने तत्काल खुद जाकर आईसीयू में केस की जांच की। दो-तीन घंटे के ओपरेशन के बाद डॉक्टर बाहर आया और अपने स्टाफ को कहा कि इस व्यक्ति को किसी प्रकार की कमी या तकलीफ ना हो। और उससे इलाज व दवा के पैसे न लेने के लिए भी कहा ।

तकरीबन 15 दिन तक मरीज अस्पताल में रहा। 

जब बिल्कुल ठीक हो गया और उसको डिस्चार्ज करने का दिन आया तो उस मरीज का तकरीबन ढाई लाख रुपये का बिल अस्पताल के मालिक और डॉक्टर की टेबल पर आया।

डॉक्टर ने अपने अकाउंट  मैनेजर को बुला करके कहा ...

इस व्यक्ति से एक पैसा भी नहीं लेना है। ऐसा करो तुम उस मरीज को लेकर मेरे चेंबर में आओ।

मरीज व्हीलचेयर पर चेंबर में लाया गया।

डॉक्टर ने मरीज से पूछा 

प्रवीण भाई ! मुझे पहचानते हो!

मरीज ने कहा लगता तो है कि मैंने आपको कहीं देखा है। 


डॉक्टर ने कहा ...याद करो ,अंदाजन दो साल पहले सूर्यास्त के समय शहर से दूर उस जंगल में तुमने एक गाड़ी ठीक की थी। उस रोज मैं परिवार सहित पिकनिक मनाकर लौट रहा था कि अचानक कार में से धुआं निकलने लगा और गाड़ी बंद हो गई। कार एक तरफ खड़ी कर  हम लोगों ने चालू करने की कोशिश की, परंतु कार चालू नहीं हुई।

 अंधेरा थोड़ा-थोड़ा घिरने लगा था। चारों और जंगल और सुनसान था।

परिवार के हर सदस्य के चेहरे पर चिंता और भय की लकीरें दिखने लगी थी और सब भगवान से प्रार्थना कर रहे थे कि कोई मदद मिल जाए।

थोड़ी ही देर में चमत्कार हुआ। बाइक के ऊपर तुम आते दिखाई पड़े ।

हम सब ने दया की नजर से हाथ ऊंचा करके तुमको रुकने का इशारा किया। 

तुमने बाईक खड़ी कर के हमारी परेशानी का कारण पूछा। 

 तुमने कार का बोनट खोलकर चेक किया और कुछ ही क्षणों में कार चालू कर दी।

हम सबके चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई। हमको ऐसा लगा कि जैसे भगवान ने आपको हमारे पास भेजा है क्योंकि उस सुनसान जंगल में रात गुजारने के ख्याल मात्र से ही हमारे रोगंटे खड़े हो रहे थे। तुमने मुझे बताया था कि तुम एक गैराज चलाते हो ।

मैंने तुम्हारा आभार जताते हुए कहा था कि रुपए पास होते हुए भी ऐसी मुश्किल समय में मदद नहीं मिलती। तुमने ऐसे कठिन समय में हमारी मदद की, इस मदद की कोई कीमत नहीं है, यह अमूल्य है।

परंतु फिर भी मैं पूछना चाहता हूँ कि आपको कितने पैसे दूं ?

    उस समय तुमने मेरे आगे हाथ जोड़कर जो शब्द कहे थे, वह शब्द मेरे जीवन की प्रेरणा बन गये हैं।

तुमने कहा था कि.....

 "मेरा नियम और सिद्धांत है कि मैं मुश्किल में पड़े व्यक्ति की मदद के बदले कभी कुछ नहीं लेता। मेरी इस मजदूरी का हिसाब भगवान् रखते हैं। "

उसी दिन मैंने सोचा कि जब एक सामान्य आय का व्यक्ति इस प्रकार के उच्च विचार रख सकता है, और उनका संकल्प पूर्वक पालन कर सकता है, तो मैं क्यों नहीं कर सकता। और मैंने भी अपने जीवन में यही संकल्प ले लिया है। दो साल हो गए है,मुझे कभी कोई कमी नहीं पड़ी, अपेक्षा पहले से भी अधिक मिल रहा है। 

यह अस्पताल मेरा है।तुम यहां मेरे मेहमान हो और तुम्हारे ही बताए हुए नियम के अनुसार मैं तुमसे कुछ भी नहीं ले सकता।

ये तो भगवान् की कृपा है कि उसने मुझे ऐसी प्रेरणा देने वाले व्यक्ति की सेवा करने का मौका मुझे दिया।

 ऊपर वाले ने तुम्हारी मजदूरी का हिसाब रखा और वो हिसाब आज उसने चुका दिया। मेरी मजदूरी का हिसाब भी ऊपर वाला रखेगा और कभी जब मुझे जरूरत होगी, वो जरूर चुका देगा। 

 डॉक्टर ने प्रवीण से कहा ....

तुम आराम से घर जाओ, और कभी भी कोई तकलीफ हो तो बिना संकोच के मेरे पास आ सकते हो।

प्रवीण ने जाते हुए चेंबर में रखी भगवान् कृष्ण की तस्वीर के सामने हाथ जोड़कर कहा कि....

हे प्रभु आपने आज मेरे  कर्म का पूरा हिसाब ब्याज समेत चुका दिया।

 " याद रखें कि एक बार भगवान् चाहे माफ कर दे, परंतु कर्मों का हिसाब चुकाना ही होगा"

Tuesday, June 2, 2020

June 02, 2020

नौकरी जाने पर घबराए नही , हिम्मत जुटाए ,आपका खुद का व्यापार आपका इंतजार कर रहा है (पार्ट-1)

नौकरी जाने पर घबराए नही , आपका खुद का व्यापार आपका इंतजार कर रहा है 

हरियाणा बुलेटिन न्यूज़ की जनहित मे मुहीम

(नेहा) स्पेशल स्टोरी- जी हाँआपको पढ़ कर थोडा अटपटा लग रहा होगा, लेकिन आज के समय मे ये जरुरी है क्योकि आज के हालतों मे हर दिन हजारों लोगो को नौकरी से निकाला जा रहा है | लेकिन यदि आप हिम्मत नही उठाएगे तो हो सकता है आप चिंता का शिकार हो जाए या हडबडाहट मे ना जाने क्या गलत कदम उठा ले | हमारे देश मे आम कहावत भी है कि "चिंता चिता समान होती है " मतलब स्पष्ट है कि यदि आप समस्या को लेकर चिंता मे रहेगे तो कुछ भी काम बेहतर तरीके से नही कर पाओगे, ओर तो ओर जिस काम के आम मास्टर हुआ करते थे वो भी काम ठीक नही कर सकते | इसलिए हम हरियाणा बुलेटिन न्यूज़ आपसे आह्वान करता है कि यदि आज के हालातो मे "आपकी नौकरी चली/ छुट जाती है तो घबराए नही , हिम्मत जुटाए ,हो सकता है आपका खुद का व्यापार आपका इंतजार कर रहा हो "  इस बेहतरीन कार्य को करने मे हरियाणा बुलेटिन न्यूज़ आपका सहयोग करेगा | आप हमसे सम्पर्क करे  9802110050 और ईमेल करे haryanabulletinnews@gmail.com 

हम इस बात से भली भाँती परिचित है कि जो व्यक्ति जितना अधिक कमाता है उतना अधिक खर्च भी करता है जैसे यदि हम महीने मे लाखो कमाते है तो बच्चो को महगे स्कूलों मे पढ़ाते है , महंगे कपडे पहनते है, अच्छी गाडी और मकान और तो दो चार नौकर भी रखने पढ़ते है | लेकिन इन हालातो मे यदि हमारी  नौकरी/जॉब चली जाती है तो हम खुद वो काम नही कर पाते जो नौकर किया करते थे व अपने खर्चो को भी कम नही कर पाते और न ही हमारे पास इतनी जमापूंजी होती कि 12 महीने निकाल पाए और बिना नौकरी काम चला पाए | 
क्योकि हमे अपने पैसे या नौकरी पर घमंड हुआ करता था इसलिए अपने परिवार, मित्र, प्यारे या रिश्तेदारों से पैसे मागने की हिम्मत नही कर पाते तो हम अपने आप को चिंता का शिकार बना लेते है जो सबसे गंभीर समस्या है जिसका आज तक कोई ईलाज भी इजात नही हुआ है, और तो और आज तक इसके ईलाज के लिए कोई शोध कार्य भी नही चल रहा है |

इसलिए जरुरी है कि इस कोरोना काल मे हम नौकरी जाने पर घबराए नही , हिम्मत जुटाए और खुद का कोई व्यापार शरू करने का विचार बनाए क्योकि हो सकता है ये समय ही आपकी किस्मत बदलने वाला हो और आने वाले समय मे आप हजारों लोगो को रोजगार देने वाले बन जाओ | इस नेक कार्य को शरू करने के हरियाणा बुलेटिन न्यूज़ आपका सहयोग करेगा एक बड़े भाई या परिवार के सदस्य की तरह ताकि आपकी हिम्मत से हम और आप देश को नई राह दिखा पाए |

हमारा स्पेशल वॉट्सएप ग्रुप ज्वाइन करे https://chat.whatsapp.com/IG1nPnVXTbp0awhlN5nJwd

Friday, May 22, 2020

May 22, 2020

यदि आपका बच्चा निजी स्कुल जाता है तो ये आपके लिए जरुरी है

निचे पढने से पहले अभिभावक व रिटार्ड अधिकारी की बात जरुर सुने

स्पेशल रिपोर्ट (संजय) यदि आप अभिभावक और आपका बच्चा निजी स्कुल मे पढता है तो ये खबर आपके काम की है क्योकि आज कोरोना काल मे देश के वितीय हालात व हर घर के वितीय हालात डगमगा गये है, लेकिन बावजूद इसके हर माता पिता चाहता है कि मेरे बच्चे अच्छे से अच्छे स्कुल मे पढ़े व जीवन मे आगे पढ़े | चाहे इसके लिए माता-पिता को किसी भी हद तक संघर्ष क्यों न करना पड़े |

देश का गरीब से गरीब व अमीर से अमीर माता-पिता अपनी हैसियत से ज्यादा अच्छे स्कुल मे शिक्षा दिलवाना चाहते है, लेकिन अचानक आए कोरोना काल ने हर किसी के वितीय हालातों को हिला दिया है | इसलिए हम सबको उम्मीद बंधी की इन हालातों मे निजी संस्थान हमारी समस्या को समझेगे या सरकार समस्या को समझ कोई उचित कदम उठाएगी | लेकिन अब तक उठाए गये कदम ऊट के मुह मे जीरे समान तो है ही लेकिन वो कदम भी जमीनी स्तर पर होते नजर नही आ रहे |

अधिकारी ही बनते है निजी स्कूलों के प्रवक्ता 

यदि आपने ऊपर दी गई ऑडियो को पूरा सुना है तो इस बात मे कोई दो राय नही होनी चाहिय कि आज निजी स्कूलों के प्रवक्ता नेता या अधिकारी बने हुए नजर आते है | जिसका जवाब देने के लिए जरुरी है कि हम सब एक हो समस्या के स्थाई समाधान के लिए प्रयास करे तो निसंदेह हम बदलाव कर पाएगे | कुछ ऐसा ही जगह जगह देखने को आपको मिला होगा लेकिन ताजा अनुभव ये भी है

पंचकूला के सेंट ज़ेवियर स्कूल द्वारा फीस बढ़ाये जाने पर पेरेंट्स ने किया हंगामा

हम कर ही क्या सकते है 

जब भी कही इस समस्या के समाधान करने की बात आती है तो हर कोई यही कहता है कि आखिर हम कर ही क्या सकते है, लेकिन हम सबकुछ कर सकते है उसके लिए हम केवल पिछले एक महीने से प्रयास कर रहे है और आज हम इस नतीजे पर पहुचे है कि हम इस समस्या का स्थाई समाधान निकाल सकते है या निकाल रहे है या निकलता हुआ हमे नजर आ रहा है |

यदि समाधान है तो हमसे भी साँझा करे 

जब हम समाधान की बात करते है तो कहोगे की समाधान हमसे साँझा करो तो आप निचे दिए गये दो लिंक पर क्लिक करके पढ़े और यदि समझा पाए या इसके समाधान मे अपना रोल अदा करना चाहते है तो हमसे जरुर जुड़े ताकि समस्या का स्थाई समाधान किया जा सके |

नियम न मानने वाले हरियाणा के निजी स्कूलों के खिलाफ पोल-खोल अभियान -हरियाणा बुलेटिन न्यूज़

हमने किया है ये यज्ञ शरू, आप भी आहुति डालो

निजी शिक्षण संस्थान समाजसेवा या निज हित व्यवसाय


बाकि पूरी डिटेल के साथ समाधान हम अगले दस दिन मे आपसे साँझा करेगे

Saturday, May 2, 2020

May 02, 2020

यह कैसा मौसम, बसंत या पतझड़ लेखक : डॉ. गणेश कौशिक

लेखक : डॉ. गणेश कौशिक
यह कैसा मौसम,
बसंत या पतझड़
सूखे पेड़ जमीन पे ,
धाराशायी  पत्ते 
एक-एक कर गिर गए 
ये  लाशें पतझड़ की
 टूटी हुई टहनियां
 गाने की जगह रोती हैं
 जगह-जगह बिखरा रक्त 
यह बसंत या पतझड़ 
कोख  उजाड़ने वालों ।
देखो कुछ तो संबंध होते होंगे तुमसे
सम्बंध नहीं तो भाई का संबंध तो
भाई का सम्बंध तो अवश्य होगा तुमसे
 एक ही मिट्टी में जन्मे हैं हम
 एक ही आसमा की छत मिली है हमें
 एक ही सूर्य की तपन
 एक ही चंद्रमा की शीतलता मिली है
 जननी एक ही है 
फिर उजाड़ ते क्यों हो कोख
यह कैसा मौसम है ?
 पतझड़ या बसंत ।

लेखक :(  डॉ. गणेश कौशिक )
May 02, 2020

लॉकडाउन के दौरान कर्मचारीओ को वेतन पूरा मिलना चाहिय या 50 % - आपकी क्या राय है ?

लॉकडाउन के दौरान कर्मचारीओ को वेतन पूरा मिलना चाहिय या 50 % - इस विषय पर उद्योगों के संगठन सुप्रीम कोर्ट भी गये है | इसी संदर्भ मे लेखक ने निजी विचार व्यक्त किये है जो निजी कम्पनी से 23 साल से काम रहे , इन्होने यह लेख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व गृह मंत्री अमित शाह को भी भेजे है, आपसे भी इस विचारो को पढ़िए और राय दीजिए आखिर क्या होना चाहिय ताकि कर्मचारी और व्यापारी मे ताल मेल बना रहे -
गृहमंत्रालय (एमएचए) के आदेश दिनांक 29.03.2020, स्थापना के लॉकडाउन के कारण बंद की वजह से अनुपस्थित के कारणकर्मचारियों को वेतन में बिना कटौती भुगतान करने के संदर्भ में 

 श्रीमान जी,  
गृहमंत्रालय (एमएचए) आदेश  दिनांक 29.03.2020 के खंड (iii) केअनुसार, "सभी नियोक्ता उद्योग, दुकान और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में हों, अपने श्रमिकों को मजदूरी का भुगतान, उनके कार्य स्थान पर, नियत तिथि पर, बिना किसी कटौती के करेंगे, जिस अवधि के दौरान उनके प्रतिष्ठान लॉकडाउन के दौरान बंद हैं ” इसके संदर्भ में दिनांक 31 मार्च 2020 को गृहमंत्रालय (एमएचए) केआदेश दिनांक 29.03.2020 की समीक्षा करने के लिए ट्विटर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी तथा ग्रह मंत्रीअमित शाह जी से अनुरोध किया था ! COVID 19 के कारण तथा अन्य कारणों से अर्थव्यवस्था धीमा है, और सभी उद्योग अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अपने कर्मचारियों को पूरी मजदूरी देना संकट के समय मुमकिन तथा उचित नहीं है जहां उद्योग अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैंइसके अलावा कर्मचारी / श्रमिकों अपने मूल स्थान पर जा रहे है क्योंकि वे जानते हैं कि उन्हें काम किए बिना पूरी मजदूरी मिल जाएगी, कर्मचारी उन उद्योगों में अपनी नौकरी में भाग नहीं ले रहे हैं जो लॉकडाउन अवधि के दौरान चल रहे हैं, जो गैर- को जन्म देते हैं। श्रम की उपलब्धता। कर्मचारियों को पूर्ण वेतन देने से वित्तीय संकट और श्रमकर्मचारी / श्रमिकों की अनुपलब्धता के कारण उद्योगों को स्थायी रूप से बंद कर दिया जाएगा, जिससे पूरे देश में बेरोजगारी उत्पन्न होगी जिसके परिणामस्वरूप अर्थव्यवस्था का पतन होगा।  औद्योगिक संगठन के एसोसिएशन ने गृहमंत्रालय (एमएचए) के आदेश दिनांक 29.03.2020 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्रीय सरकार को नोटिस जारी किया है और दो सप्ताह में जवाब देना है। यह स्थिति को और अधिक नाजुक बना देगा क्योंकि नियोक्ता कर्मचारियों को मजदूरी का भुगतान करने में सक्षम नहीं हैं, कई संगठनों ने भी मार्च 2020 के महीने के लिए पूर्ण वेतन का भुगतान नहीं किया है! और बिना किसी उत्पादकता के पूर्ण मजदूरी भुगतान उचित नहीं है, नियोक्ताओं द्वारा यह लॉकडाउन वित्तीय संकट के कारण स्थायी रूप से हो सकता है यदि यह लॉकडाउन नियोक्ताओं द्वारा स्थायी रूप से होगया तो क्याहोगा? एक कहानी है, मुर्गी से रोज एक अंडा मिलता है और मुर्गी का गला कभी नहीं काटता।  यदि मजदूरी भुगतान उद्योगों द्वारा किया जाता है जो वर्तमान स्थिति में संभव नहीं है, तो उद्योग स्थायी रूप से बंद हो जाएंगे और यदि कर्मचारियों को मजदूरी नहीं दी जाती है, तो कर्मचारियों को परेशानी होगी इसलिए तालाडाउन अवधि के लिए कर्मचारियों को वेतन @ 50% करने के आदेश करना बेहतर है।  कर्मचारी संघ अपनी आवाज भी उठाए गा यदि कोई निर्णय उनके खिलाफ आता है कर्मचारियों को मजदूरी नहीं दी जाती है, और संगठनों में काम करने के लिए भुगतान किए बिना प्रवासी श्रमिक काम पर नहीं लौटेंगे। इसके अलावा, कर्मचारियों को वेतन नहीं देने के कारण संगठनों में औद्योगिक संबंध (आईआर) मुद्दे होंगे जो देश की उत्पादकता को प्रभावित करेंगे। इसके अलावा, आईडीअधिनियम, 1947 की धारा 2KKK के अनुसार, छंटनी का प्रावधानहै, जो प्राकृतिक आपदा या अन्यथा के कारण रोजगार प्रदान करने में असमर्थता के कारण अपने कर्मचारियों को @ 50% वेतन बनाने की शर्त रखता है। उपरोक्त सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए,  आपसे अनुरोध है कि गृहमंत्रालय (एमएचए) के आदेश दिनांक 29.03.2020 की समीक्षा करें और अप्रैल 2020  के महीने के लिए मजदूरी 50%  करने के लिए तुरंत संशोधित आदेश जारी करें !
सादर,
डॉक्टर आकाश तंवर 
(लेखक 23 वर्ष के अनुभव के साथ निजी कम्पनी मे कॉर्पोरेट मानव संसाधन पेशेवर है)

यदि आप लेखक, कवि या साहित्यकार है तो हमसे जुड़ने के लिए  हमे ईमेल करे hr@haryanabulletinnews.com