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Tuesday, August 16, 2022

August 16, 2022

स्वास्तिक पर ऑस्ट्रेलिया में लगा बैन:1920 में हिटलर ने इसे क्यों बनाया अपने झंडे का निशान; क्या हिंदुओं से अलग है नाजियों का स्वास्तिक?

स्वास्तिक पर ऑस्ट्रेलिया में लगा बैन:1920 में हिटलर ने इसे क्यों बनाया अपने झंडे का निशान; क्या हिंदुओं से अलग है नाजियों का स्वास्तिक?

नई दिल्ली : ऑस्ट्रेलिया के दो स्टेट साउथ वेल्स और विक्टोरिया में स्वास्तिक पर बैन लगा दिया गया है। यहां स्वास्तिक के निशान को किसी भी तरह से दिखाना क्राइम माना जाएगा। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड और तस्मानिया ने भी स्वास्तिक को बैन करने की बात कही है।


हालांकि, इन दोनों ही राज्यों में हिंदू, जैन और बौद्धों को धार्मिक उपयोग के लिए स्वास्तिक के इस्तेमाल की इजाजत दी गई है।

इसके पहले जुलाई 2020 में फिनलैंड ने अपने एयरफोर्स के प्रतीक चिन्ह से स्वास्तिक हटा दिया था। पिछले साल अमेरिका के मैरीलैंड राज्य में स्वास्तिक को बैन करने के लिए एक बिल पेश हुआ था। तब हिंदू संगठनों ने इसका कड़ा विरोध जताया था।

हरियाणा बुलेटिन न्यूज़ एक्सप्लेनर में जानेंगे कि आखिर दुनियाभर में स्वास्तिक पर बैन लगाने की होड़ क्यों मची है? हिंदू धर्म के अलावा स्वास्तिक का संबंध किस-किस से है? इसकी शुरुआत कब हुई और इसका मतलब क्या है?
*सबसे पहले स्वास्तिक को बैन करने की वजह जानते हैं...*

न्यू साउथ वेल्स के ज्यूइश बोर्ड ऑफ डेप्यूटीज के CEO डेरेन बार्क का कहना है कि स्वास्तिक नाजियों का प्रतीक है। यह हिंसा को दिखाता है। कट्टरपंथी संगठन भर्ती के लिए भी इसका इस्तेमाल करते हैं। हमारे राज्य में काफी समय से इसके प्रदर्शन पर रोक लगाने की बात चल रही थी। अब अपराधियों को सही सजा मिलेगी।

वहीं हिंदू काउंसिल ऑफ ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुरेंद्र जैन ने कहते हैं कि बहुत समय तक हिंदू समुदाय अपने शांति के प्रतीक को दिखाने के लिए सहज नहीं था, क्योंकि यह बुराई का प्रतीक बन गया था, लेकिन अब ऐसा नहीं है।
हिटलर की आत्मकथा ‘मीन काम्फ’ में है स्वास्तिक के नाजी प्रतीक चिन्ह बनने की कहानी

1920 के आसपास की बात है। हिटलर अपनी नाजी सेना को ताकतवर बना रहा था। तभी उसके दिमाग में झंडा बनाने का ख्याल आया। एक ऐसा झंडा जो जर्मन लोगों और उसकी सेनाओं का प्रतिनिधित्व करे। जिसे देखते ही नाजियों में जोश भर जाए। हिटलर की आत्मकथा ‘मीन काम्फ’ में इस बात का जिक्र है।

इसी साल नाजी पार्टी को एक झंडा मिल गया। लाल रंग के इस झंडे के बीच में सफेद रंग का एक सर्किल बना था। इस सर्किल के बीचों-बीच 45 डिग्री झुका एक स्वास्तिक का इस्तेमाल किया गया। इसे हकेनक्रेज कहा गया।
ये तस्वीर सेकेंड वर्ल्ड वॉर के दौरान की है। हिटलर की नाजी सेना हाथ में अपना झंडा लिए मार्च कर रही है। इस झंडे में स्वास्तिक जैसा प्रतीक नजर आ रहा है।

‘मीन काम्फ’ किताब के मुताबिक यह झंडा न सिर्फ आदर्श जर्मन साम्राज्य, बल्कि नाजी लोगों के बेहतर भविष्य का भी प्रतीक था। इस झंडे में इस्तेमाल होने वाला लाल रंग नाजी मूवमेंट और समाजवाद को बताता था। वहीं, सफेद रंग जर्मन राष्ट्रवाद का प्रतीक था। इसके अलावा स्वास्तिक नाजी लोगों के संघर्ष को दिखाता था। यही नहीं यह आर्यन समाज की जीत का भी प्रतीक था।

*स्वास्तिक पर विवाद कब और क्यों शुरू हुआ*

1933 से लेकर 1945 के बीच जब जर्मनी में हिटलर की नाजी सेना पावर में आई, तब उसके सैनिक हाथों में झंडे लेकर नरसंहार करने लगे। इस दौरान लाखों यहूदियों को बेरहमी से मारा गया। जिसे दुनिया होलोकॉस्ट के नाम से जानती है। इसके बाद से ही इस प्रतीक चिन्ह को यहूदी-विरोधी, नस्लवादी और फासीवादी माना जाता है।

सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बाद यूरोप और दुनिया के दवाब में इस नाजी झंडा और स्वास्तिक जैसे प्रतीक को जर्मनी में भी बैन कर दिया गया था। इसके अलावा फ्रांस, ऑस्ट्रिया और लिथुआनिया में भी इसके इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी गई थी।
तस्वीर12वीं शताब्दी की है। इसमें सोने के क्रास और स्वास्तिक दिख रहे हैं। जो किसी राजकुमारी के ड्रेस के कॉलर के हैं। यूरोप के कुछ हिस्सों में बुराई को दूर करने के लिए ड्रेस में इसकी कढ़ाई कराई जाती थी।
तस्वीर12वीं शताब्दी की है। इसमें सोने के क्रास और स्वास्तिक दिख रहे हैं। जो किसी राजकुमारी के ड्रेस के कॉलर के हैं। यूरोप के कुछ हिस्सों में बुराई को दूर करने के लिए ड्रेस में इसकी कढ़ाई कराई जाती थी। 
स्वास्तिक है क्या, इसका मतलब क्या है
स्वास्तिक शब्द संस्कृत भाषा के शब्द स्वास्तिका से बना है। यह एक क्रॉस की तरह आकृति है। इसकी चारों भुजाएं 90 डिग्री पर मुड़ी होती हैं। ये भुजाएं चारों ओर एक ही तरफ क्लॉकवाइज मुड़ती हैं। हिंदू धर्म में इसे समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता रहा है। दुनिया के दूसरे देशों में जरूरत के मुताबिक इसके अलग-अलग मायने निकाले जाते हैं।

इसकी शुरुआत कब और क्यों हुई
स्वास्तिक की शुरुआत कब हुई, इस बात को जानने के लिए जब हमने रिसर्च किया तो दो फैक्ट सामने आए…

पहला: हिस्ट्री एक्स्ट्रा वेबसाइट के मुताबिक सबसे पुराना स्वास्तिक 15 हजार साल पहले पाया गया था।

दूसरा: आर्काइव डॉट ओआरजी के मुताबिक 10 हजार ईसा पूर्व से स्वास्तिक का इस्तेमाल यूरोप के कई हिस्सों में होता आ रहा है।

1908 में यूक्रेन में खुदाई के दौरान एक हाथी का दांत मिला था। इस पर एक पक्षी उकेरा गया था, जो एक स्वास्तिक की तरह दिख रहा था। हालांकि यह किसी को नहीं पता है कि पहली बार इसे कैसे और किसने बनाया?

मेसोपोटामिया सभ्यता में भी इस्तेमाल होता था स्वास्तिक
अभी के इराक में मेसोपोटामिया सभ्यता के शुरुआत के सबूत मिलते हैं। यह सभ्यता 3200 से 600 ईसा पूर्व तक थी। यानी आज से 2622 साल पहले। इस समय स्वास्तिक प्राचीन मेसोपोटामिया के सिक्कों पर बनाया जाने वाला पसंदीदा प्रतीक था।

इसके अलावा स्कैंडिनेविया के भगवान थोर के हथोड़े में भी इसका चिन्ह पाया जाता है। यह बाएं हाथ का स्वास्तिक होता था।

19वीं शताब्दी के अंत और 20 वीं शताब्दी की शुरुआत में तो कई सारे प्रोडक्ट के प्रचार के लिए भी स्वास्तिक का इस्तेमाल किया जाना शुरू हो गया था। 
19वीं शताब्दी के अंत और 20 वीं शताब्दी की शुरुआत में तो कई सारे प्रोडक्ट के प्रचार के लिए भी स्वास्तिक का इस्तेमाल किया जाना शुरू हो गया था। 
अब जानते हैं हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म में स्वास्तिक का अर्थ… हिंदू: करीब 3500 साल पहले भारत में आर्यन के इतिहास के साथ ही स्वास्तिक की मौजूदगी के सबूत मिलते हैं। आज भी नई गाड़ी खरीदने के वक्त या फिर नए मकान में प्रवेश करने के समय एक प्रतीक चिन्ह का इस्तेमाल किया जाता है। इसे स्वास्तिक कहते हैं। सदियों से हिंदू धर्म में इसे तरक्की और शुभ माना जाता है।

जैन: जैन इसे सातवें तीर्थंकर का प्रतीक मानते हैं। जैन धर्म में यह भी माना जाता है कि इसकी चारों भुजाएं भक्त को अगले जन्म की याद दिलाती हैं।

बौद्ध धर्म: बौद्ध धर्म स्वास्तिक को बुद्ध के पैरों या पदचिन्ह के निशान का प्रतीक मानता है। किसी किताब के शुरू और आखिरी पन्ने पर इसे बनाया जाता है। आधुनिक तिब्बती लोग इसे कपड़ों पर भी बनाते हैं।
क्या हिंदुओं और नाजी पार्टी का स्वास्तिक एक है?

हिंदू घरों में इस्तेमाल होने वाला स्वास्तिक बनावट और अर्थ दोनों ही मामले में नाजी के स्वास्तिक यानी ‘हकेनक्रेज’ से अलग है। बनावट की बात करें तो हिंदुओं के घरों में बनाए जाने वाले स्वास्तिक के चारों कोणों में चार डॉट्स होते हैं। ये डॉट्स चार वेदों के प्रतीक हैं। जबकि नाजी झंडे पर बने स्वास्तिक में ये डॉट्स नहीं थे।

हिंदू धर्म में स्वास्तिक पीला और लाल रंग का इस्तेमाल होता है, जबकि नाजी झंडे में सफेद रंग की गोलाकार पट्टी में काले रंग का स्वास्तिक बना है। नाजी संघर्ष के प्रतीक को तौर पर इसका इस्तेमाल करते थे। जबकि हिंदू धर्म में यह शुभ और तरक्की का प्रतीक है।

Monday, August 15, 2022

August 15, 2022

PM मोदी का लालकिले पर 83 मिनट भाषण:जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान और जय अनुसंधान का नारा दिया; भावुक भी हो गए

PM मोदी का लालकिले पर 83 मिनट भाषण:जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान और जय अनुसंधान का नारा दिया; भावुक भी हो गए

नई दिल्ली : देश सोमवार को आजादी का जश्न मना रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से नौवीं बार राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया। इस दौरान उन्हें 21 तोपों की सलामी भी दी गई। 83 मिनट के अपने भाषण में उन्होंने देश के सामने 5 संकल्प रखे। भ्रष्टाचार, परिवारवाद, भाषा और लोकतंत्र का जिक्र किया। गांधी, नेहरू, सावरकर को यादकर नमन किया।
नारी शक्ति के सम्मान और उनके गौरव की बात करते हुए भावुक भी हो गए। उन्होंने कहा, मैं एक पीड़ा जाहिर करना चाहता हूं। मैं जानता हूं कि शायद ये लाल किले का विषय नहीं हो सकता। मेरे भीतर का दर्द कहां कहूं। वो है किसी न किसी कारण से हमारे अंदर एक ऐसी विकृति आई है, हमारी बोल चाल, हमारे शब्दों में.. हम नारी का अपमान करते हैं। क्या हम नारी को अपमानित करने वाली हर बात से मुक्ति का संकल्प ले सकते हैं।
हमें पंच प्रण लेना होगा, तभी आजादी के दीवानों के सपने साकार होंगे
PM ने कहा कि अगर हम अपनी ही पीठ थपथपाते रहेंगे तो हमारे सपने कहीं दूर चले जाएंगे। इसलिए हमने कितना भी संघर्ष किया हो उसके बावजूद भी जब आज हम अमृत काल में प्रवेश कर रहे हैं, तो अगले 25 साल हमारे देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। आज मैं लाल किले से 130 करोड़ लोगों को आह्वान करता हूं। साथियों मुझे लगता है कि आने वाले 25 साल के लिए भी हमें उन पांच प्रण पर अपने संकल्पों को केंद्रित करना होगा। हमें पंच प्रण को लेकर, 2047 जब आजादी के 100 साल होंगे, आजादी के दीवानों के सारे सपने पूरे करने का जिम्मा उठाकर चलना होगा।
पहला प्रण: अब देश बड़े संकल्प लेकर ही चले। बहुत बड़े संकल्प लेकर चलना होगा। बड़ा संकल्प है, विकसित भारत।

दूसरा प्रण: किसी भी कोने में हमारे मन के भीतर गुलामी का एक भी अंश अगर अभी भी है तो उसको किसी भी हालत में बचने नहीं देना है। हमें उससे मुक्ति पानी ही होगी।

तीसरा प्रण: हमें हमारी विरासत पर गर्व होना चाहिए। यही विरासत जिसने कभी भारत का स्वर्णिम काल दिया था। इस विरासत के प्रति हमें गर्व होना चाहिए।

चौथा प्रण: एकता और एकजुटता। 130 करोड़ देशवासियों मे एकता। न कोई अपना न कोई पराया।

पांचवां प्रण: नागरिकों का कर्तव्य। जिसमें PM भी बाहर नहीं होता, CM भी बाहर नहीं होता है। वो भी नागरिक हैं। आने वाली 25 साल के सपनों को पूरा करने के लिए एक बहुत बड़ी प्राणशक्ति है। जब सपने बड़े होते हैं। जब संकल्प बड़े होते हैं तो पुरुषार्थ भी बहुत बड़ा होता है।
मोदी के भाषण की 10 बड़ी बातें: जिन्होंने देश को लूटा, उन्हें लौटाना होगा

भ्रष्टाचार और परिवारवाद को खत्म करना होगा: मोदी ने कहा, 'आज हम दो बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। भ्रष्टाचार और 'परिवारवाद' या भाई-भतीजावाद। हमें अपनी संस्थाओं की ताकत का एहसास करने के लिए, योग्यता के आधार पर देश को आगे ले जाने के लिए 'परिवारवाद' के खिलाफ जागरूकता बढ़ानी होगी। भ्रष्टाचार देश को दीमक की तरह खोखला कर रहा है, हमें इससे लड़ना है। उन्होंने कहा कि जिन्होंने देश को लूटा, उन्हें लौटाना होगा। बैंक लूटनेवालों की संपत्ति जब्त हो रही है।
हमारी प्रतिभा भाषा के बंधनों में बंध जाती है: मोदी ने कहा कि हमने देखा है कि कभी कभी हमारी प्रतिभा भाषा के बंधनों में बंध जाती है। ये गुलामी की मानसिकता का परिणाम है। हमें हमारे देश की हर भाषा पर गर्व होना चाहिए।
जय अनुसंधान का नारा दिया: PM ने आज लाल किले की प्राचीर से नया नारा दिया। उन्होंने कहा कि लाल बहादुर शास्त्री ने जय जवान, जय किसान का नारा दिया था। इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने इसमें जय विज्ञान जोड़ा और अब इसमें जय अनुसंधान जोड़ने का समय आ गया है। अब जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान और जय अनुसंधान हो।
संयुक्त परिवार देश की बड़ी विरासत: मोदी ने कहा कि जब तनाव की बात होती है तो लोगों को योग दिखता है। सामूहिक तनाव की बात होती है तो भारत की पारिवारिक व्यवस्था दिखती है। संयुक्त परिवार की एक पूंजी सदियों से हमारी माताओं के त्याग बलिदान के कारण परिवार नाम की जो व्यवस्था विकसित हुई, ये हमारी विरासत है जिस पर हम गर्व करते हैं।भारत लोकतंत्र की जननी: मोदी ने कहा कि भारत लोकतंत्र की जननी है। मदर ऑफ डेमोक्रेसी है। जिनके जेहन में लोकतंत्र होता है वे जब संकल्प करके चल पड़ते हैं। सामर्थ्य दुनिया की बड़ी बड़ी सल्तनतों के लिए भी संकट का काल लेकर आती है ये मदर ऑफ डेमोक्रेसी। हमारे भारत ने सिद्ध कर दिया कि हमारे पास ये अनमोल सामर्थ्य है। 75 साल की यात्रा में आशाएं, अपेक्षाएं, उतार-चढ़ाव सब के बीच हर एक के प्रयास से हम यहां तक पहुंच पाए। आजादी के बाद जन्मा मैं पहला व्यक्ति था जिसे लाल किले से देशवासियों का गौरव गान करने का अवसर मिला।
हमने उन्हें याद किया, जिन्हें भुला दिया गया: जब हम आजादी की चर्चा करते हैं, तो जंगलों में रहने वाले आदिवासी समाज का गौरव नहीं भूलते। बिसरा मुंडा समेत अनगिनत नाम हैं, जिन्होंने आजादी के आंदोलन की आवाज बनकर सुदूर जंगलों में आजादी के लिए मर मिटने की प्रेरणा जताई। एक दौर वो भी था, जब स्वामी विवेकानंद, स्वामी अरविंदो, रवींद्र नाथ टैगोर भारत की चेतना जगाते रहे। 2021 से शुरू हुए आजादी के अमृत महोत्सव में देशवासियों ने व्यापक कार्यक्रम किए। इतिहास में इतना बड़ा महोत्सव पहली बार हुआ। हमने उन महापुरुषों को भी याद किया, जिन्हें इतिहास में जगह नहीं मिली या उन्हें भुला दिया गया।
सबने दर्द खुशी खुशी सहा: मोदी ने कहा, '14 अगस्त को भारत ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस को भी हृदय के घावों को याद करके मनाया। देश वासियों ने भारत के प्रति प्रेम के कारण सबने दर्द खुशी खुशी सहा। आजादी के अमृत महोत्सव में हम सेना के जवानों, पुलिसकर्मी, ब्यूरोक्रेट, लोकसेवक, जनप्रतिनिधि, शासक-प्रशासकों को याद करने का अवसर है।'
डराया गया... फिर भी भारत आगे बढ़ता रहा: 75 साल की हमारी ये यात्रा अनेक उतार चढ़ाव से भरी हुई है। सुख दुख की छाया मंडराती रही है। इसके बीच भी हमारे देशवासियों ने पुरुषार्थ किया। उपलब्धियां हासिल कीं। ये भी सच्चाई है, सैकड़ों सालों की गुलामी ने गहरी चोटें पहुंचाई हैं। इसके भीतर एक जिद थी, जुनून था।

 आजादी मिल रही थी तो देशवासियों को डराया गया। देश के टूटने का डर दिखाया गया। लेकिन, ये हिंदुस्तान है। ये सदियों तक जीता रहा है। हमने अन्न का संकट झेला, युद्ध के शिकार हुए। आतंकवाद का प्रॉक्सीवार, प्राकृतिक आपदाएं झेलीं, लेकिन इसके बावजूद भारत आगे बढ़ता रहा।
बच्चे कह रहे हैं कि अब विदेशी खिलौने से नहीं खेलेंगे: PM ने कहा, '5 साल का बच्चा घर में विदेशी खिलौने से नहीं खेलने का संकल्प करता है, तब आत्मनिर्भर भारत उसकी रगों में दौड़ता है। आप देखिए, PLI स्कीम। एक लाख करोड़ रुपए, दुनिया के लोग भारत में नसीब आजमाने आ रहे हैं। भारत मैन्युफैक्चरिंग हब बनता जा रहा है। आज देश बहुत तेजी से प्रगति कर रहा है। जब हमारा ब्रह्मोस दुनिया में जाता है तो कौन हिंदुस्तानी होगा, जिसका मन आसमां को नहीं छूता होगा। हमें आत्मनिर्भर बनना है। हमें ऊर्जा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनना है। सोलर, विंड एनर्जी का क्षेत्र हो, मिशन हाइड्रोजन, बायो फ्यूल, इलेक्ट्रिक व्हीकल पर जाने की बात हो हमें आत्मनिर्भर बनना होगा।'सेना के जवानों, सेनानायकों को सलाम: आजादी के 75 साल बाद जिस आवाज को सुनने को लिए हमारे कान तरस रहे थे। 75 साल के बाद लाल किले से तिरंगे को सलामी देने का काम मेड इन इंडिया तोप ने किया है। कौन हिंदुस्तानी होगा जिसको ये आवाज नई प्रेरणा और ताकत नहीं देगी। मेरे देश की सेना के जवानों का अभिनंदन करना चाहूंगा। मेरी सेना के जवानों ने, सेनानायकों ने जिस जिम्मेवारी के साथ कंधे पर उठाया है, उनको आज मैं सलाम करता हूं। सेना का जवान मौत को मुट्ठी में लेकर चलता है।
मोदी भाषण देने के बाद बच्चों के बीच पहुंच गए। उनसे बातचीत की।

Wednesday, August 10, 2022

August 10, 2022

रोजगार विभाग का क्लर्क 23 हजार लेते काबू:जींद में युवक ने बेरोजगारी भत्ता लिया और BEd भी कर ली; 48 हजार वापस मांगे

रोजगार विभाग का क्लर्क 23 हजार लेते काबू:जींद में युवक ने बेरोजगारी भत्ता लिया और BEd भी कर ली; 48 हजार वापस मांगे

जींद : हरियाणा के जींद में विजिलेंस ने फर्जी तौर पर लिए गए बेरोजगारी भत्ते के केस का मामला रफा-दफा करने की एवज में 23 हजार रिश्वत लेते रोजगार कार्यालय के क्लर्क को गिरफ्तार किया है। उससे 500-500 के 46 नोट बरामद हुए हैं। विजिलेंस ने इन नोटों पर पावडर लगाकर शिकायतकर्ता को क्लर्क रोशन को देने के लिए दिए थे। विजिलेंस केस दर्ज कर क्लर्क से पूछताछ कर रही है।
*ये था मामला*

जींद के गांव नगूरां निवासी मनदीप ने विजिलेंस को दी शिकायत में बताया कि वह रोजगार कार्यालय से बेरोजगारी भत्ता लेता था। इसी बीच उसने बीएड भी कर ली, लेकिन बेरोजगारी भत्ता लेना चालू रखा। असल में शिक्षा जारी रखने की सूरत में भत्ता नहीं लिया जा सकता। जब रोजगार कार्यालय ने जांच की तो उसकी सच्चाई उनके सामने आ गई। तब तक वह बेरोजगारी भत्ते की एवज में ली गई 48 हजार रुपए ले चुका था। विभाग ने उससे यह राशि वापस मांगी।
*पुलिस केस की धमकी दी*

उसने बीएड तो कर ली थी, लेकिन वह बेरोजगार था। उसके पास इतने रुपए नहीं थे कि वह 48 हजार रुपए विभाग को लौटा सके। उसने रोजगार कार्यालय के क्लर्क रोशन से संपर्क किया। आरोप है कि रोशन ने उससे इस मामले को रफा दफा करने के लिए 23 हजार रुपए की रिश्वत मांगी। न देने पर उसके खिलाफ पुलिस में केस दर्ज कराने की धमकी भी दी। मनदीप ने क्लर्क से सौदा पक्का कर लिया।
पूनिया अस्पताल के पास से पकड़ा

साथ ही मनदीप ने पूरे मामले की जानकारी विजिलेंस जींद को दे दी। विजिलेंस ने क्लर्क को पकड़ने के लिए जाल बिछाया। मनदीप को 23 हजार रुपए देने को कहा गया। मनदीप ने क्लर्क से बात की तो उसने पैसों के साथ उसे जींद में पूनिया अस्पताल के पास बुला लिया।
*500 के 46 नोट दिए*

आबकारी एवं कराधान विभाग के ईटीओ नरेश अहलावत को डयूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया। जबकि स्टेट विजिलेंस ब्यूरो के निरीक्षक मनीष कुमार को टीम की कमान सौंपी गई। जिसमें एसआई अनिल कुमार, एएसआई बलजीत, कमलजीत, हवलदार सुनील, सिपाही संजय को शामिल किया गया। टीम ने शिकायतकर्ता मनदीप को 46 नोट 500-500 रुपए के डयूटी मजिस्ट्रेट से हस्ताक्षर तथा पाउडर लगा कर दे दिए।
विजिलेंस की टीम भी मनदीप के साथ ही वहां पहुंच गई। जैसे ही रोजगार विभाग के क्लर्क रोशन ने उससे 23 हजार रुपए लिए, विजिलेंस ने छापा मार कर उसे पकड़ लिया। पुलिस ने रोशन के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर पूछताछ शुरू कर दी है।
August 10, 2022

देश में कांग्रेस का सफाया तय, भूपेंद्र हुड्डा भी छोड़ सकते हैं कांग्रेस – दिग्विजय

सपने देखना सबका अधिकार, ओमप्रकाश धनखड़ को गठबंधन धर्म के अनुसार बयान देने चाहिए - दिग्विजय सिंह चौटाला

Everyone's right to dream, Omprakash Dhankhar should give statement according to alliance religion - Digvijay Singh Chautala

*- देश में कांग्रेस का सफाया तय, भूपेंद्र हुड्डा भी छोड़ सकते हैं कांग्रेस – दिग्विजय*
*- दिग्विजय ने गांव मिरान में शहीद अमित की प्रतिमा का अनावरण और बुसान में लाइब्रेरी का किया उद्घाटन* 

तोशाम/चंडीगढ़ : जननायक जनता पार्टी के प्रधान महासचिव दिग्विजय सिंह चौटाला ने आज अपने एक दिवसीय तोशाम दौरे पर गांव मिरान में शहीद अमित कुमार की प्रतिमा का अनावरण किया। उन्होंने गांव बुसान में युवाओं के लिए फ्री लाइब्रेरी का उद्घाटन भी किया। इस दौरान वे पत्रकारों से भी रूबरू हुए। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ओपी धनखड़ के एक बयान पर पूछे गए सवाल के जवाब में दिग्विजय चौटाला ने कहा कि ओपी धनखड़ को गठबंधन धर्म के अनुसार बयान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बनाने का रास्ता हमेशा जनता जनार्दन तय करती है। दिग्विजय ने कहा कि क्या पता तीसरी बार मनोहर लाल ही मुख्यमंत्री बन जाएं या फिर दुष्यंत चौटाला मुख्यमंत्री बन जाएं। दिग्विजय चौटाला ने कहा कि ये भी संभव है कि ओमप्रकाश धनखड़ ही मुख्यमंत्री बन जाएं। उन्होंने कहा कि यह सब भविष्य के गर्भ में छिपा है। दिग्विजय चौटाला ने कहा कि सपने देखना और उन्हें साकार करने का सबका अधिकार है। उन्होंने याद दिलाया की भाजपा नेताओं ने भी किसी वक्त लोकसभा में दो सांसद होते हुए भी देश में सरकार बनाने का सपना देखा था और उसी के चलते अटल बिहारी वाजपेयी जी देश में भाजपा के पहले प्रधानमंत्री बने। दिग्विजय चौटाला ने कहा कि गठबंधन नेताओं का प्रयास होना चाहिए कि कांग्रेस को छोड़कर कोई भी मुख्यमंत्री बन जाए। उन्होंने कहा कि ओमप्रकाश धनखड़ को सपने देखने जैसी बातें कहने की बजाय गठबंधन का धर्म निभाना चाहिए और सबका सम्मान करना चाहिए। 
वहीं जेजेपी प्रधान महासचिव ने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आज कांग्रेस की हालत खराब हो गई है। उन्होंने कहा कि अब तो कुलदीप बिश्नोई जैसे पुराने कांग्रेसी कांग्रेस को छोड़कर जा रहे हैं। दिग्विजय ने कहा कि भविष्य में भूपेंद्र हुड्डा भी कांग्रेस को छोड़ दें तो आश्चर्य नहीं होगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की नीयत में हमेशा से खोट रहा है इसलिए कांग्रेस खात्मे की ओर है।
इससे पहले दिग्विजय सिंह चौटाला ने गांव मिरान के 20 वर्षीय शहीद अमित की प्रतिमा का अनावरण किया। उन्होंने कहा कि देश की सेना में हरियाणा के युवाओं का अहम योगदान है। उन्होंने कहा कि हरियाणा का युवा देश पर प्राण न्योछावर करने का मादा रखते हैं। गांव बुसान में युवाओं की मांग पर उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला की सहायता से 2.50 लाख से बनी लाइब्रेरी का आज दिग्विजय सिंह चौटाला ने उद्घाटन किया और युवाओं को आगे भी हर संभव मदद देने का भरोसा दिया। साथ ही उन्होंने लाइब्रेरी में दो कंप्यूटर देने का वादा युवाओं से किया। उन्होंने युवा प्रतिभाओं को भी सम्मानित किया। जुई में दिग्विजय चौटाला ने गौशाला की शैड हेतु निजी कोष से दिए गए 5 लाख 51 हजार के बने शैड का उद्घाटन किया।
August 10, 2022

हर घर तिरंगा जागरूकता अभियान को कलाकार बनाएंगे और सशक्त : दीपक कौशिक

हर घर तिरंगा जागरूकता अभियान को कलाकार बनाएंगे और सशक्त : दीपक कौशिक
Every house will make the tricolor awareness campaign an artist and empower it: Deepak Kaushik

 शहर के कई सामाजिक संगठन मिलकर चलाएंगे अभियान

जींद : देश के मान सम्मान हमारा तिरंगा आजादी के अमृत महोत्सव को लेकर हर घर तिरंगा पूरे देश में फहराया जाएगा इसी मुहिम को और सशक्त बनाने के लिए सौल एंड स्पिरिट आर्ट सोसाइटी, संस्कार भारती, इतिहास संकलन समिति, महाराजा अग्रसेन सदाव्रत, गोपाल विद्या मंदिर,शैडो चिल्ड्रन रिसर्च सेंटर, चिंतपूर्णी जागरण मंडल, भगवती एडवर्टाइजमेंट स्टूडियो संयुक्त रूप से बुधवार को ताऊ देवी लाल चौक पर हर घर तिरंगा जागरूकता अभियान कार्यक्रम करेंगे कार्यक्रम संयोजक दीपक कौशिक ने बताया कि इस अभियान में सेल्फी विद तिरंगा, हस्ताक्षर अभियान, टैटू मेकिंग, हिमाचल के जाने-माने चित्रकार मनोज द्वारा लाइव पेंटिंग, तिरंगा साइकिल यात्रा व शहर के जाने-माने कलाकारों द्वारा देश भक्ति के गीतों की प्रस्तुति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे। इस जागरूकता अभियान के मुख्य अतिथि विधायक प्रतिनिधि राजन चिल्लाना, विशिष्ट अतिथि गोपाल विद्या मंदिर के अध्यक्ष जितेंद्र सैनी व अध्यक्षता करेंगे भाजपा जिलाध्यक्ष राजू मोर। दीपक कौशिक ने बताया कि इस अभियान से कलाकार अपनी कला के माध्यम से हर घर तिरंगा की मुहिम को और मजबूती प्रदान करेंगे।
August 10, 2022

रक्षाबंधन पर 200 साल बाद दुर्लभ योग:भद्रा के कारण एक ही मुहूर्त, रात 8.25 से बांध सकेंगे राखी, खरीदारी के लिए पूरा दिन शुभ

रक्षाबंधन पर 200 साल बाद दुर्लभ योग:भद्रा के कारण एक ही मुहूर्त, रात 8.25 से बांध सकेंगे राखी, खरीदारी के लिए पूरा दिन शुभ

इस बार रक्षाबंधन की तिथि और नक्षत्र को लेकर कन्फ्यूजन बना हुआ है। क्योंकि सावन की पूर्णिमा दो दिन यानी 11 और 12 अगस्त को है। इस पर देशभर के ज्योतिषियों का कहना है कि भद्रा खत्म होने के बाद पूर्णिमा और श्रवण नक्षत्र का योग, गुरुवार को ही बन रहा है। इसलिए 11 अगस्त की रात में ही राखी बांधना चाहिए। ये ही कारण है कि इस बार रक्षाबंधन के लिए सिर्फ एक ही मुहूर्त रहेगा। जो करीब 1 घंटे 20 मिनट का होगा। इस पर्व पर ग्रहों की दुर्लभ स्थिति से बन रहे शुभ योगों के कारण पूरे दिन खरीदारी का शुभ मुहूर्त भी रहेगा।
*राजयोग में मनेगा पर्व*

पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र का कहना है कि 11 अगस्त, गुरुवार को आयुष्मान, सौभाग्य और ध्वज योग रहेगा। साथ ही शंख, हंस और सत्कीर्ति नाम के राजयोग भी बन रहे हैं। गुरु-शनि वक्री होकर अपनी राशियों में रहेंगे। सितारों की ऐसी दुर्लभ स्थिति पिछले 200 सालों में नहीं बनी। इस महासंयोग में किया गए रक्षाबंधन सुख-समृद्धि और आरोग्य देने वाला रहेगा।
*तिथि, नक्षत्र और वार का शुभ संयोग*

11 अगस्त को पूर्णिमा तिथि और श्रवण नक्षत्र के साथ ही गुरुवार का शुभ संयोग बन रहा है। ज्योतिष ग्रंथों में इस योग को खरीदारी का शुभ मुहूर्त बताया गया है। जिसमें व्हीकल, प्रॉपर्टी, ज्वेलरी, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य चीजों की खरीदारी से लंबे समय तक फायदा मिलेगा। साथ ही किसी भी नई शुरुआत के लिए ये दिन बहुत अच्छा रहेगा। इस दिन जॉब जॉइन करना, बड़े लेन-देन या निवेश करना फायदेमंद रहेगा। श्रवण नक्षत्र होने से पूरा दिन व्हीकल खरीदारी के लिए बेहद शुभ रहेगा।
*क्या कहते हैं ज्योतिषी*

11 अगस्त को पूर्णिमा तिथि करीब 9:35 पर शुरू होगी जो कि अगले दिन सुबह तकरीबन 7.16 तक रहेगी। वहीं, गुरुवार को भद्रा सुबह 10.38 पर शुरू होगी और रात 8.25 पर खत्म होगी। इसलिए काशी विद्वत परिषद के साथ ही उज्जैन, हरिद्वार, पुरी और तिरुपति के विद्वानों का कहना है कि भद्रा का वास चाहे आकाश में रहे या स्वर्ग में, जब तक भद्रा काल पूरी तरह खत्म न हो जाए तब तक रक्षा बंधन नहीं करना चाहिए। इसलिए सभी ज्योतिषाचार्यों का एकमत होकर कहना है कि 11 अगस्त, गुरुवार को रात 8.25 के बाद ही रक्षाबंधन मनाना चाहिए।
*11 को दिन में क्यों नहीं बांधे राखी*

कुछ लोगों का मानना है कि 11 अगस्त को भद्रा पाताल में रहेगी। जिसका धरती पर अशुभ असर नहीं होगा। इसलिए पूरे दिन रक्षाबंधन कर सकते हैं। लेकिन विद्वत परिषद का कहना है कि किसी भी ग्रंथ या पुराण में इस बात का जिक्र नहीं है। वहीं, ऋषियों ने पूरे ही भद्रा काल के दौरान रक्षाबंधन और होलिका दहन करने को अशुभ बताया है। इसलिए भद्रा के वास पर विचार ना करते हुए इसे पूरी तरह बीत जाने पर ही राखी बांधना चाहिए। वहीं, 12 तारीख को पूर्णिमा तिथि सुबह सिर्फ 2 घंटे तक ही होगी और प्रतिपदा के साथ रहेगी। इस योग में भी रक्षाबंधन करना निषेध है।
*प्रदोष काल में रक्षाबंधन शुभ*

विद्वानों का कहना है कि रक्षाबंधन के समय को लेकर ग्रंथों में प्रदोष काल को सबसे अच्छा माना गया है। यानी सूर्यास्त के बाद करीब ढाई घंटे का समय बहुत ही शुभ होता है। दीपावली पर इसी काल में लक्ष्मी पूजा की जाती है। साथ ही होलिका और रावण दहन भी प्रदोष काल में करने का विधान है। ज्योतिष ग्रंथों में बताया है कि इस समय किए गए काम का शुभ प्रभाव लंबे समय तक रहता है।
August 10, 2022

पिछले 3 वर्षों में इन 3 प्रमुख सहयोगियों ने छोड़ा भाजपा का साथ

पिछले 3 वर्षों में इन 3 प्रमुख सहयोगियों ने छोड़ा भाजपा का साथ

नई दिल्लीः वर्ष 2019 के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से संबंध तोड़ने वाला जनता दल (यूनाइटेड) उसका तीसरा प्रमुख राजनीतिक सहयोगी है। लगातार दूसरी बार 2019 में लोकसभा चुनाव जीतकर केंद्र की सत्ता में भाजपा के आने के 18 महीनों के भीतर उसके दो पुराने सहयोगियों, शिवसेना और अकाली दल ने उससे नाता तोड़ लिया था। अगले लोकसभा चुनाव में दो साल से कम समय बचा है, और अब जद(यू) ने उससे गठबंधन तोड़ लिया है। 
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से अलग होने वाला जद(यू) सांसदों और विधायकों के मामले में भाजपा के सहयोगियों में सबसे बड़ा दल है। जद(यू) के जार्ज फर्नांडीस कभी राजग के संयोजक हुआ करते थे, लेकिन नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली पार्टी ने 2013 में भी भाजपा से उस वक्त नाता तोड़ लिया था, जब नरेंद्र मोदी को भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया गया था। 
वर्ष 2017 में कुमार ने राजद से नाता तोड़ लिया था और महागठबंधन सरकार से अलग होकर भाजपा के साथ सरकार बना ली थी। इसके बाद भाजपा और जद(यू) ने 2020 का विधानसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ा और राज्य में सरकार बनाई, लेकिन संबंधों में तनाव के कारण मंगलवार को कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और राजद के साथ मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया। पिछले नौ वर्षों में यह दूसरा मौका है, जब जद(यू) ने भाजपा से रिश्ते तोड़े हैं। राजग से जद(यू) के बाहर होने के बाद भाजपा के लिए देश का पूर्वी हिस्सा खासा चुनौतीपूर्ण हो गया है। खासकर, पश्चिम बंगाल, ओड़िशा और बिहार। 
दक्षिण के राज्य पहले से ही भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण रहे हैं। सिर्फ कर्नाटक ही एक ऐसा राज्य है, जहां भाजपा की सरकार है। आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल में अभी वह एक ताकत के रूप में उभरने की कोशिश कर रही है। जद(यू) के अलग होने के बाद लोकसभा सीट की संख्या के हिसाब से अब दो ही ऐसे बड़े राज्य हैं, जहां भाजपा गठबंधन की सरकारें हैं और वे हैं उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र। इन दोनों राज्यों में लोकसभा की 128 सीट हैं। बिहार, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में भाजपा सत्ता में नहीं है और इन राज्यों में लोकसभा की कुल 122 सीट हैं। हालांकि, 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पश्चिम बंगाल में 18 और बिहार में 17 सीट पर जीत हासिल की थी। 
उत्तर और पश्चिमी क्षेत्रों में मजबूत प्रर्दशन के दम पर भाजपा 2014 से केंद्र की सत्ता में है और उसकी कोशिश पूर्वी और दक्षिण क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति मजबूत करने की है। ‘‘सेंटर फॉर स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसायटीज'' के प्रोफेसर संजय कुमार ने भाजपा से जद(यू) के अलग होने पर कहा, ‘‘यह स्पष्ट संकेत है कि सहयोगी दल भाजपा के साथ सहज नहीं हैं और एक-एक कर उससे अलग होते जा रहे हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन साथ ही इससे भाजपा को एक अवसर भी मिलता है कि जिस राज्य की क्षेत्रीय पार्टी ने उसका साथ छोड़ा है, वहां वह अपनी स्थिति मजबूत कर सके।'' 
अकाली दल के नरेश गुजराल ने कहा कि भाजपा ‘‘एकला चलो रे'' की रणनीति पर विश्वास करती है और राजग सिर्फ कागजों पर ही रह गया है। उन्होंने कहा, ‘‘अभी जो उसमें (राजग) हैं, वह भी अपना अस्तित्व बचाने के लिए वहां से निकल जाएंगे।'' वर्ष 2014 से 2019 के बीच महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व वाली पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी और चंद्रबाबू के नेतृत्व वाली तेलुगु देशम पार्टी राजग से अलग हो गए। 
वर्ष 2019 में शिवसेना से भाजपा का गठबंधन टूट गया और उसने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस से गठबंधन कर वहां सरकार बना ली। हालांकि, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना का बड़ा धड़ा टूट गया और उसने भाजपा के साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बना ली। शिंदे इस गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। 
इनके अलावा झारखंड में सुदेश महतो के नेतृत्व वाला ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन, ओ पी राजभर के नेतृत्व वाला सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, हनुमान बेनीवाल के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी, बोडो पीपुल्स पार्टी, गोरखा जनमुक्ति मोर्चा, गोवा फॉरवर्ड पार्टी, एमडीएमके और डीएमडीके भी भाजपा के नेतृत्व वाले राजग से अलग हो गए। केंद्रीय स्तर पर राजग में फिलहाल कम से कम 17 सहयोगी दल हैं, जबकि कई राजनीतिक संगठनों से उसका कुछ राज्यों में भी गठबंधन है।

Tuesday, August 9, 2022

August 09, 2022

सहकारिता क्षेत्र के विस्तार के लिए जेम पोर्टल बहुत उपयोगी : शाह

सहकारिता क्षेत्र के विस्तार के लिए जेम पोर्टल बहुत उपयोगी : शाह

नई दिल्लीः केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि देश में सहकारिता क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और इसके विस्तार के लिए गवर्नमेंट ई माकेर्टप्लेस (जीईएम)पोर्टल बहुत उपयोगी प्लेटफार्म सिद्ध होगा। 
शाह ने यहां सहकारिता मंत्रालय,भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ (एनसीयूआई) और जी ई एम द्वारा आयोजित कार्यक्रम में जी ई एम पोटर्ल पर सहकारिताओं की ‘ऑनबोर्डिंग' को ई-लॉन्च करने के मौके पर यह बात कही। इस अवसर पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, केन्द्रीय सहकारिता एवं उत्तर पूर्व क्षेत्र विकास राज्य मंत्री बी एल वर्मा और एनसीयूआई के अध्यक्ष दिलीप संघानी समेत अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
शाह ने कहा , ‘‘ आज का दिन भारत के इतिहास का एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण दिन है। 1942 में 9 अगस्त को ही गांधी जी ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ भारत छोड़ो आंदोलन शुरु किया था और आज़ादी के अमृत महोत्सव में 9 अगस्त के दिन ही आज एक और महत्वपूर्ण काम हो रहा है जिसमें देशभर की सभी सहकारी समितियों के लिए जीईएम यानी जेम के दरवाजे खुल गए हैं। उन्होने कहा कि सहकारिता क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और इस क्षेत्र के विस्तार के लिए यह पोटर्ल एक बहुत उपयोगी प्लेटफार्म सिद्ध होगा।'' 
सहकारिता मंत्री ने कहा कि सरकार की अधिकतर इकाइयां जेम के माध्यम से ही ख़रीदारी करती हैं इसलिए सहकारी समितियों को अपना बाज़ार बढ़ाने के लिए जेम पर आपूर्ति के लिए पंजीकरण की भी तैयारी शुरु करनी चाहिए। उन्होने भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ से भी सहकारी समितियों की माकेर्टिंग बढ़ाने की अपील करते हुए कहा कि इसके लिए जेम से अच्छा और कोई रास्ता नहीं हो सकता। 
उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से इस क्षेत्र को नजरंदाज किया गया लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ऐतिहासिक सुधारों व आधुनिकीकरण के साथ इसके विस्तार को गति दे रहे हैं। सहकारिता मंत्रालय ने विस्तार के लिए ढेर सारे उपाय किए हैं और पिछले एक साल में मंत्रालय 25 से 30 नयी पहलों पर लगातार समांतर रूप से काम कर रहा है। उन्होने कहा कि ‘पैक्स से लेकर अपैक्स' तक एक समग्र द्दष्टिकोण के साथ सहकारिता नीति भी बनाई जा रही है। 
उन्होंने कहा, ‘‘ सरकार को सहकारिता का विस्तार करना है लेकिन इसका कोई डेटाबेस ही नहीं है, इसलिए मंत्रालय सभी प्रकार की सहकारी समितियों का एक राष्ट्रस्तर का डेटाबेस भी बना रहा है। यूनिवर्सिटी की स्थापना का काम भी आगे बढ़ा है, इससे नए प्रोफेशनल तैयार होंगे। इस यूनिवर्सिटी में सहकारिता क्षेत्र में काम करने वाले लोगों और नए कर्मचारियों के लिए ट्रेनिंग की व्यवस्था भी उपलब्ध होगी। 
एक एक्सपोर्ट हाउस भी रजिस्टर किया जा रहा है जो दिसंबर तक हो पूरा जाएगा। यह देशभर के कोऑपरेटिव को एक्सपोर्ट करने के लिए प्लेटफार्म प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव एक्ट में भी आमूलचूल परिवर्तन किए जा रहे हैं और सरकार ने सारे पैक्स को कंप्यूटराइज करने का निर्णय भी लिया है।''